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आवारा पशुओं से फसल बचाने को 12 गांवों के ग्रामीण दे रहे पहरा

7 वर्ष पहले
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आवारापशुओं से परेशान दर्जनभर गांवों के किसानों ने ठीकरी पहरा शुरू किया है। इसके लिए किसानों ने अपने स्तर पर करीब दो दर्जन टीमें गठित की हैं। ये टीमें दिन-रात खेतों में आवारा पशुओं को खदेडऩे के लिए निगरानी करेंगी।

ग्रामीणों किसानों ने इसके लिए हर दिन के हिसाब से टीमों की ड्यूटियां लगाई हैं। किसान गुरप्रीत सिंह, शेर सिंह, रूप सिंह, पप्पी सिंह, बलजिंद्र सिंह, बलबीर सिंह, करनैल सिंह, मिठू सिंह, जरनैल सिंह ने कहा कि शहर में घूमने वाले करीब एक हजार पशु शाम के समय उनके खेतों में घुस जाते हैं। वे खेतों में घुसकर गेहूं अन्य फसलों को नुकसान पहुंचाते हैंं। सबसे ज्यादा परेशानी शहर के साथ लगते भरपूर, रत्ताखेड़ा, लाली, रतनगढ़, कमाना, नथवान, खोखर ढाणी, जाखन दादी, हमजापुर, सहनाल गांवों के किसानों को उठानी पड़ती है। ये पशु समूहों में खेतों में घुस जाते हैं और पूरी फसल को चट कर जाते हैं। कई किसानों को तो 2-3 बार गेहूं की फसल की बिजाई करनी पड़ी है।

समस्या को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से भी मिल चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। गौशाला के लोग भी जगह का अभाव बता रहे हैं। ऐसे में उनके पास अपनी फसलों को बचाने के लिए कोई चारा नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके लिए कमेटियां गठित की गई हैं। प्रत्येक कमेटी में दर्जनभर किसानों ग्रामीणों को शामिल किया गया है। कमेटी में शामिल लोग खेतों में आवारा पशुओं से बचाव के लिए रखवाली करेंगे। निगरानी करने वाले लोग चयनित जगह पर घूमते रहेंगे और आवारा पशुओं को खेतों से खदेड़ेंगे।

रतिया। अवारा पशुओं से फसलों को बचाने के लिए ठीकरी पहरा देते किसान।

पशु छोडऩे वालों पर लगेगा जुर्माना

किसानों ने कहा कि जो लोग शहर में आवारा पशु छोड़कर जाते हैं, उन पर भी निगरानी रखी जाएगी। कमेटी उन पर जुर्माना लगाएगी। मौजूदा समय में जो पशु शहर में घूम रहे हैं, वे उन्हें बाहर छोड़कर आएंगे। किसी को भी शहर में पशु नहीं छोडऩे दिए जाएंगे। इसको लेकर बाकायदा शहर के वार्डों गांवों में मुनादी भी करवाई जाएगी।