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मेरे पुत्त लई काल बन गया टीका

7 वर्ष पहले
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पांच बीमारियों से बचाव के लिए लगता है पेंटा का टीका

बच्चोंको पहले डीपीटी का टीका लगाया जाता था जो डिप्थीरिया, परट्यूसिस टिटेनेस से बचाव के लिए होता था। पेंटा का टीका पांच बीमारियों हिपेटाइटिस-बी, एच-इन्फ्लूएंजा, डिप्थीरिया, परट्यूसिस टिटेनेस से बचाव करता है। इस तरह से पांच वैैक्सिन का काम अब एक ही वैैक्सिन करता है। पेंटा वेलेंट नाम के इस जीवन रक्षक वैैक्सिन का टीका नवजात शिशुओं को तीन बार ही लगाया जाता है। पहला इंजेक्शन 6 सप्ताह की उम्र में, दूसरा 10 सप्ताह में और तीसरा इंजेक्शन 14 सप्ताह की आयु में लगता है।

रामनगर कालोनी में मृतक परमीत सिंह के शव को गोद में लेकर बैठी उसकी नानी जाबीर कौर।

रतिया। मृतक परमीत सिंह की मां किरणपाल कौर का ढ़ांढस बंधाती पड़ोस की महिलाएं।

लोगों में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ गुस्सा

रामनगरकाॅलोनी में पेंटा टीके लगाने में हुई लापरवाही के लिए स्वास्थ्य विभाग के लोगों को जिम्मेदार मानते हुए कॉलोनी के लोगों में काफी रोष व्याप्त है। लोगों ने विभाग के खिलाफ हंगामा कर रोष जताया और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। लोगों के गुस्से को भांपते हुए तुरंत एक्शन लेते हुए एएनएम उसकी एक अन्य सहायक पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया।

{ पेंटा टीके से हुई बच्चे की मौत के बाद नवजात के परिजनों का रो-रो कर है बुरा हाल

बलदेवबरेटा | रतिया

रामनगरकालोनी में दो माह के बच्चे की पेंटा के टीके से हुई मौत के बाद उसके माता-पिता परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रो कर बुरा हाल है। नवजात परमीत सिंह की मां किरणपाल को अपने बच्चे के शव को देख कर बिलख-बिलख कर रो रही थी।

वो इतना कि कह पा रही थी कि जे पता हुंदा ऐह टीका मेरे पुत्त दी जान लैलूगा, मैं ओहनू ऐह टीका कदे ना लगवांदी, मेरे पुत्त लई काल बन गया टीका। किरणपाल कौर टीका लगवाने के लिए घर से उठाए उन कदमों को भी कोस रही है जिन कदमों से वह आंगनबाड़ी तक अपने बेटे को खुशी-खुशी बीमारियों से बचाव के लिए टीका लगवाने के लिए लेकर गई थी। वह कभी तो बेटे के शव को देख कर बेहोश हो रही थी कभी टीकाकरण के उस कार्ड को, जिसके आधार पर वह टीका लगवाने गई थी। उसके मन में बस बार बार यही ख्याल रहा था कि काश उसे घर मे कोई काम हो जाता तो वह जा पाती। किरणपाल कौर को पड़ौस से ही जानकारी मिली कि आज आंगनबाड़ी में बच्चों को