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रतिया में नेता दल-बदल कर ही चढ़े विधानसभा की सीढ़ियां

7 वर्ष पहले
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वैसेतो दल-बदलकर कर सत्ता हासिल करने के हरियाणा की राजनीति में कई रिकार्ड है, लेकिन एक रिकार्ड रतिया के नाम से भी है। वो यह कि यहां अधिकांश नेताओं ने दल-बदलकर ही विधानसभा भवन की सीढ़ियां चढ़ी हैं। दल बदलने के बाद ही उन्हें सत्ता का सुख मिल पाया है।

रतिया विधानसभा क्षेत्र 1977 में अस्तित्व में आया। पहली बार जनता पार्टी के चुनाव चिन्ह पर यहां से पीर चंद का मुकाबला कांग्रेस के श्योपाल से हुआ, जिसमें पीर चंद ने जीत हासिल की। अगले विधानसभा चुनाव 1982 में हुए। यहां से कांग्रेस के नेकीराम ने लोकदल के आत्मा सिंह गिल को मात्र 198 मतों के अंतर से हराकर जीत हासिल की। 1987 में लोकदल के आत्मा सिंह गिल ने कांग्रेस के पीर चंद को 18हजार 247 मतों के अंतर से हराकर जीत हासिल की। इस चुनाव में आत्मा सिंह गिल को 61.59 प्रतिशत मत हासिल हुए थे जबकि पीरचंद को 33.67 मत मिले। इसके बाद पीर चंद ने जनता पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए। 1991 के विधानसभा चुनावों में पीर चंद ने कांग्रेस को अलविदा कहते हुए बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी का दामन थाम लिया और हविपा ने पीर चंद पर दांव खेलते हुए उन्हें टिकट दे दी। पीर चंद यहां से हरियाणा विकास पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर जीतकर विधानसभा पहुंचे। तब उन्होंने भाजपा के रामस्वरूप रामा को हराया था। 1996 के विधानसभा चुनावों से ऐन पहले रामस्वरूप रामा ने भी भाजपा का अलविदा कहते हुए बंसीलाल की हविपा में शामिल हो गए। पार्टी ने रामस्वरूप रामा को रतिया विधानसभा क्षेत्र से टिकट दी, जिसमें रामा ने जीत हासिल की। हविपा ने हाल ही में भाजपा को छोड़कर आए रामस्वरूप राम को प्रदेश के मंत्रीमंडल में जगह देते हुए उन्हेें खेल एवं वस्तु कला मंत्री बनाया। तब रामा ने तत्कालीन समता के आत्मा सिंह गिल को हराया था। 2000 के चुनावों में इनेलो ने जरनैल सिंह को चुनाव मैदान में उतारा और उन्होंने रिकार्ड जीत हासिल की। तब जरनैल सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी महावीर प्रसाद को हराकर जीत हासिल की। 2005 के चुनाव में कांग्रेस ने आत्मा सिंह गिल के पुत्र गुरदीप गिल को टिकट दी। तभी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्ञानचंद ओड ने कांग्रेस को अलविदा कहते हुए इनेलो ज्वाइन कर ली। इनेलो ने बिना किसी देरी से ज्ञानचंद ओड को टिकट दे दी। ज्ञानचंद ओड ने गुरदीप गिल को हराकर जीत हासिल की। इसके बाद जरनैल सिंह न