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उम्मीद करना जीवन के विकास का मूलमंत्र : साध्वी ज्योति प्रभा

7 वर्ष पहले
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जैनसाध्वी ज्योति प्रभा महाराज ने कहा कि उम्मीद करना जीवन के विकास का मूलमंत्र है। हमेशा जीवन में आशावादी रहना चाहिए। जो आशावादी नहीं रहता वह दुखी रहता है। साध्वी गुरुवार को जैन स्थानक में चातुर्मास के समापन समारोह से रुखसत होने से पहले श्रद्धालुओं को प्रवचन दे रही थी। उनके साथ साध्वी सुगंध महाराज सुपावन महाराज मौजूद रही। तीनों साध्वियों ने कहा कि रतिया में हुआ चातुर्मास कार्यक्रम याद रहेगा।

उन्होंने कहा कि भौतिकवादी युग में ज्यादातर लोग अपने जीवन में अधिक से अधिक सांसारिक संसाधनों को जुटाने में लगे हुए हैं। जिनके पास भोग विलासिता की वस्तुएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं तो वे निराश हैं और जिनके पास सांसारिक सुख भोगने में सक्षम होते हुए भी अधिक लालसा में जुटे रहते हैं वे भी मानसिक रूप से अशांत हैं। यानी दोनों दुखी रहते हैं। व्यक्ति अपने कर्म से ही जीवन की परिस्थितियों का स्वयं निर्धारण करता है।

इसलिए जीवन में संतोष धन सबसे उत्तम धन है। अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखें तो सुख ही सुख का अहसास है, वर्ना दुखों का तो कोई अंत हो ही नहीं सकता। इस मौके पर डॉ. सुनीता गोयल, सुरेश जिंदल, मोहन जैन, चतुर्भुज जैन और डाॅ. नरेश गोयल के अलावा एसएस जैन सभा के प्रधान मदन जैन भी थे। जैन ने बताया कि जैन महा साध्वियां शुक्रवार को जैन स्थानक से पद विहार करेंगी।

रतिया। जैन स्थानक में चातुर्मास कार्यक्रम में उपस्थित श्रदालु।