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पीएचसी के हैंडओवर पर स्वास्थ्य बीएंडआर विभाग आमने-सामने

6 वर्ष पहले
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अहरवांमें डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बनी पीएचसी के हैंडओवर को लेकर स्वास्थ्य विभाग और लोक निर्माण बीएंडआर विभाग आमने-सामने गए हैं। बीएंडआर विभाग भवन को स्वास्थ्य विभाग के हवाले करना चाहता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का कहना है वह अधूरे भवन को नहीं लेगा।

दरअसल करीब पांच फुट की दीवार को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस जगह पर पास के ही एक किसान ने दावेदारी जताई है। विवाद की वजह से इमारत का उद्घाटन भी नहीं हो रहा है।

बता दें, गांव अहरवां में बीते साल ग्रामीणों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से गांव में पीएचसी की मांग की थी। सरकार ने इसको लेकर आदेश जारी कर दिए। पंचायत ने गांव में जलघर की जगह को लेकर प्रस्ताव पारित कर दिया। इसके लिए डेढ़ करोड़ रुपये की राशि मंजूर कर दी गई। जलघर की जगह पर पीएचसी का भवन बन गया लेकिन उसकी चारदीवारी को लेकर विवाद चल रहा है। पास के ही किसान ने पीएचसी की कुछ जगह को अपनी निजी जगह बताया हुआ है। विवाद को लेकर निर्माण कार्य रोकना पड़ गया। मौजूदा समय में करीब पांच फुट दीवार का काम अधर में लटका हुआ है जबकि भवन अन्य चारदीवारी का काम पूरा हो चुका है। लोक निर्माण बीएंडआर विभाग की ओर से स्वास्थ्य विभाग को उक्त भवन अपने अधीन लेने को कहा जा चुका है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने साफ कह दिया है कि वे अधूरे भवन को नहीं लेंगे। दोनों विभागों की आपसी खींचतान का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से भवन बनने के बावजूद भी अहरवां आसपास के गांवों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा। एसएमओ डॉ. वीके जैन ने कहा कि लोग निर्माण बीएंडआर विभाग कई बार पीएचसी के भवन को हैंडओवर के लिए हिदायत जारी कर चुका है लेकिन अधूरे भवन को स्वास्थ्य विभाग किसी भी सूरत में नहीं लेगा।