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हंसने वालों को भी गम हो सकता है, आसपास देखना बम हो सकता है
महाराजअग्रसेन जयंती महोत्सव के तहत अग्रवाल सभा रेवाड़ी की ओर से बाल भवन में हास्य कवि सम्मेलन के अायोजन में जमकर व्यंग्य बाण छोड़े गए। सम्मेलन में गजेंद्र सोलंकी अपनी वीर रस की कविताओं के माध्यम से कहा कि महाराजा अग्रसेन ने समाजवाद का सपना देखा था।
‘बनारस की सुबह, अवध की शाम लाया हूं’ कविता प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन को दिल्ली से आए कवि रविक ने अपने अनोखे अंदाज से भारत द्वारा मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक यान पहुंचने का वर्णन करते हुए कहा कि ‘सफलता है बड़ी, मंगल पर पहुंचा यान भारत का’। कवि राजेन्द्र कलकल ने आतंकवाद पर व्यंग्य करते हुए कहा कि ‘हंसने वालों को भी गम हो सकता है, आसपास देखना बम हो सकता है’। हलचल हरियाणवी ने अपने जोशीले अंदाज में कहा कि ‘भोली सुरत में संत जैसे दिखते हैं तो, कारनामे काले करते हैं’। डॉ. सरिता शर्मा ने त्यौहारों के संदर्भ में कविता पाठ करते हुए कहा कि ‘सपने के नशेमन को फिर एक बार सजाना, होली, दिवाली ईद भी मिलकर मनाना’। जबलपुर से पधारे कवि सुदीप भोला ने केजरीवाल पर हास्य के बाण छोड़ते हुए कहा कि ‘कोई निंबू समझता है, कोई गन्ना समझता है, मगर अन्ना की मजबूरी को अन्ना समझता है, मगर आम-आदमी से शिकायत है कि वो उसे मुन्ना समझता है’। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में रमेश अग्रवाल विशिष्ट अतिथि विजय गोयल रहे। जबकि सम्मेलन की अध्यक्षता जगदीश प्रसाद मित्तल ने की। सभी अतिथियों ने महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सभा के प्रधान राधेश्याम गुप्ता, महाराजा अग्रसेन जयंती के चेयरमैन राजेंद्र सिंहल ने अतिथियों का अभिनंदन किया।
रेवाड़ी . अग्रसेनजयंती महोत्सव के दौरान बाल भवन में कवि सम्मेलन का आनंद लेते श्रोता और रचनाएं प्रस्तुत करते कवि हलचल हरियाणवी, सुदीप भोला और अशोक बत्रा।
कविता से पाकिस्तान को चेताया
अलवरसे पधारे विनीत चौहान ने बाढ़ पीडि़तों की सहायता करने वाले सेना के जवानों के बारे में कहा कि ‘जिनके हाथों में पत्थर है होठों पर गाली है, उन एहसान फरामोशों की हमने जान बचाई है’ वहीं पाकिस्तान को चेताते हुए उन्होंने कहा कि ‘अपनी इस केसर घाटी को इतना लहू दे चुके हैं हम, अब तो जो भी फूल खिलेंगे वो हमारे होंगे’ आदि कविताओं पर पांडाल तालियों से गूंज उठा। साथ ही उन्होंने हरियाणवी कला और संस्कृति के सा