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नहीं समझा चपरासी की नौकरी के भी लायक

7 वर्ष पहले
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भास्कर विशेष

उम्र36 साल, नाम रामकृत्त, बेरली कलां गांव, नेशनल स्तर का धावक, 73 बार कर चुका रक्तदान और यह सिलसिला अभी लगातार जारी है।

रामकृत्त के खून से सैकडों को जिंदगी मिली, मगर आज तक ये शख्स एक नौकरी, वो भी कांट्रैक्ट बेस में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद के लिए पक्षपात की उपेक्षा झेल रहा है। स्वास्थ्य विभाग में ही निकली कांट्रैक्ट बेस चतुर्थ श्रेणी पद की नौकरी में ही तमाम योग्यताओं के बावजूद उसे वेटिंग सूची में भी स्थान नहीं दिया गया। क्वालीफिकेशन में उसे बाकी पात्रों के बराबर नंबर दिए गए, मगर साक्षात्कार लेने वाली टीम ने उसे महज आधा नंबर देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया। जबकि स्वास्थ्य विभाग के ही वॉलेंटियर के तौर पर वह गांव में ही सालों से पोलियो अभियान में काम कर रहा है।

अधिकारियोंके हाथों का मोहरा बन गया रामकृत्त

सिविलअस्पताल में निकली चतुर्थ श्रेणी पद की नौकरी तक में रामकृत्त को अधिकारियों के हाथ का मोहरा बनना पड़ा। शहर के सामान्य अस्पताल में कांट्रैक्ट बेस पर चतुर्थ श्रेणी पद के लिए 4 से 6 जून तक सामान्य अस्पताल में साक्षात्कार हुए। पद के लिए 10वीं पास योग्यता निर्धारित थी। इसमें बहुत से आवेदनकर्ताओं ने इंटरव्यू दिए। साक्षात्कार लेने वाली टीम में एक डीसी नोमानी, एनएचएम से डिप्टी सिविल सर्जन, स्थानीय डिप्टी सिविल सर्जन एसएमओ शामिल थे। दिलचस्प बात ये रही कि बीए पास रामकृत्त उस लिस्ट तक में भी जगह नहीं बना पाए।

अब आरटीआई से मांगी गई जानकारियों के अनुसार आइने का दूसरा पहलू भी सामने आया। जिन उम्मीदवारों का चयन नौकरी के लिए किया गया उनमें कोई भी 12वीं से ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं, जबकि रामकृत्त स्नातक योग्यता रखता है।

साक्षात्कार के दौरान अधिकारियों को स्वास्थ्य विभाग के साथ कई सालों तक जनहितैषी कार्यक्रमों में सहयोग करना, अनेक बार रक्तदान करना तथा नेशनल लेवल पर पदक जीतने के अलावा सबसे अधिक शैक्षणिक योग्यता भी पसंद नहीं आई। रामकृत्त को चारों साक्षात्कार लेने वाले अधिकारियों में से एनएचएम के सिविल सर्जन ने ही आधा नंबर दिया, बाकी ने उसे किसी नंबर लायक नहीं समझा और जीरो दर्ज किया। जबकि चयनित पात्रों को कुल 5 से लेकर 9 नंबर तक दिए।

73बार रक्तदान, खेल में नेशनल पदक

बेशकरामकृत्त के सामाजिक कार्य उपलब्धियां विभाग के अधिकारियों को साक्षात्कार में नहीं रिझा