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हर कलमकार के लिए प्रेरणापुंज हैं बाबूजी : डाॅ. त्रिखा
जिलेके गांव गुड़ियानी में जन्मे साहित्यकार एवं पत्रकार स्व बाबू बालमुकुंद गुप्त की 107वीं पुण्यतिथि के अवसर पर गुरुवार को मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में ‘बाबू बालमुकुंद गुप्त स्मृति-समारोह’ का आयोजन किया गया। हरियाणा साहित्य अकादमी, पंचकूला तथा बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद, रेवाड़ी के संयुक्त तत्त्वाधान में आयोजित समारोह में पुस्तक लोकार्पण, विचार-गोष्ठी तथा बाबू बालमुकुंद गुप्त पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विवि के कुलपति महेन्द्र कुमार रहे तथा अध्यक्षता हरियाणा स्वतंत्रता सेनानी सम्मान-समिति के अध्यक्ष हरिराम आर्य ने की। गोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार विजय सहगल एवं हरियाणा साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ चन्द्र त्रिखा ने मुख्य वक्ता के तौर पर भाग लिया।
प्रसंगोंके माध्यम से किया याद
इसअवसर पर कुलपति महेन्द्र कुमार ने कहा कि देशभक्त कलमकार बाबू बालमुकुंद गुप्त के गुलामी के दिनों में कलम के माध्यम से एक ओर जहां आजादी की अलख जगाई वहीं दूसरी ओर पत्रकारिता के क्षेत्र में उच्च आदर्श स्थापित किए। अध्यक्षीय संबोधन में हरिराम आर्य ने गुप्तजी को हिंदी का निर्माता तथा भाषा का परिमार्जक बताया। उन्होंने उनके लेखन से जुड़े अनेक रोचक प्रसंगों के माध्यम से याद किया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. चन्द्र त्रिखा ने राष्ट्रीय सरोकारों से जुड़ी गुप्तजी की लेखनी को हर कलमकार के लिए प्रेरणापुंज बताते हुए कहा कि उनके बहुमुखी योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वरिष्ठ पत्रकार एवं कथाकार विजय सहगल ने कहा कि हिंदी साहित्य, भाषा तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में गुप्तजी का योगदान केवल अतुलनीय है अपितु आज भी प्रेरक एवं प्रासंगिक है। गीतकार विपिन सुनेजा तथा संस्कृति लेखक राजेश चुघ ने भी समारोह में अपनी प्रस्तुतियां दी।
समारोह में डॉ. तारा सक्सेना, कृष्णलता यादव, प्रो रमेशचन्द्र शर्मा, दर्शना शर्मा, ऋषि सिंहल, महाशय भीमसिंह, महाशय केदार, दलबीर पूल, अहमना भारद्वाज, प्राचार्य हजारीलाल, राजेन्द्र निगम राज, परमानंद वसु, डॉ. संतवाल देसवाल, प्रो. ओपी गर्ग, डॉ. विजय इन्दु, राजकुमार, रायसिंह वर्मा, सत्यपाल चौहान, मुकुट अग्रवाल, डॉ. एसएन सक्सेना, अशोक प्रधान, श्रीपति शेखावत, उग्रसेन अग्रवाल, विजया चौहान, मनीष राव, योगेश कौशिक मुख्य तौर पर मौजूद रहे।
रेवाड़