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7 साल बाद सोमवार को सोम नदी में शुरू होगी वैध माइनिंग, लोगों को मिलेगा सस्ता रेत-बजरी

5 वर्ष पहले
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जोलोगमकान बना रहे हैं या फिर बनाने की प्लानिंग में हैं। उनके लिए अच्छी खबर है। अब मकान बनाने की लागत कम होगी। क्योंकि सोम नदी और भौली ( बरसाती नदी) नदी में माइनिंग शुरू हो गई है। वीरवार को इसका औपचारिक शुभारंभ कर दिया गया। सोमवार से नदी से रेत बजरी निकालने का काम शुरू हो जाएगा। अभी रणजीतपुर यूनिट से माइनिंग होगी। ऐसा सात साल बाद हो रहा है कि सोम नदी में वैध माइनिंग होगी। प्रदेश में 2009 से खनन पर पाबंदी है।

वैध माइनिंग शुरू होने से रेत बजरी के रेट में कमी आएगी। क्योंकि जिले में अवैध माइनिंग का मटीरियल रहा था। जिसे माइनिंग माफिया मनमाने दामों पर बेचता था। माइनिंग शुरू होने से बाजार में रौनक तो आएगी ही साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। हालांकि सबसे बड़ी यूनिट ताजेवाला यूनिट (यमुना नदी में) है। लोगों को ज्यादा सस्ता रेत बजरी इस यूनिट में खनन शुरू होने के बाद ही मिल पाएगा। खनन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कुछ ठेकेदार को एनवायरमेंट क्लीयरेंस मिल चुकी है और पॉल्यूशन विभाग से कंसेंट टू आपरेट मिलने की प्रक्रिया चल रही है। बस कुछ औपचारिकता पूरी होनी बाकी है। हालांकि सोम नदी भौली नदी में माइनिंग खुलने से पुलिस खनन विभाग की दिक्कतें बढ़ेगी। खनन माफिया उनको भ्रमित करने का प्रयास करेंगे।

कार्यवाहक माइनिंग अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि गौराबनी से साढौरा तक के एरिया में माइनिंग शुरू हो चुकी है। इस एरिया में 28 गांव पड़ते हैं। इस एरिया का ठेका एस्टीन एक्सीवेशन एंड माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड को 24.16 करोड़ में गया है। आठ साल के लिए ऑक्शन हुई है।

सीमेंट उद्योग चमकेगा, रोजगार भी बढ़ेगा

माइनिंगखुलने से सीमेंट उद्योग को भी फायदा होगा। क्योंकि माइनिंग बंद होने से कंस्ट्रक्शन का काम कम चल रहा था। इससे सीमेंट का रेट प्रति बैग 100 रुपए तक गिर गए थे। सीमेंट व्यापारियों का कहना है कि रेत और बजरी लोगों को सस्ती मिलेगी तो कंस्ट्रक्शन का काम ज्यादा होगा और सीमेंट की मांग बढ़ेगी। सीमेंट का रेट प्रति बैग 230 से 240 रुपए चल रहा है। जोकि 320 रुपए तक चला गया था। माइनिंग बंद होने से हजारों लोग बेरोजगार हो गए थे। लोगों ने अपने वाहन ट्रैक, ट्रैक्टर, जेसीबी माइनिंग में लगाए हुए थे, लेकिन माइनिंग बंद होने से उनका रोजगार छिन गया था। कुछ ने तो वाहन किस्तों में लिए हुए थे, उसे भर नहीं पा रहे थे। इन लोगों को अब दोबारा से रोजगार मिलेगा। यमुना या अन्य नदियों के आसपास के गांवों में हर परिवार से कोई कोई व्यक्ति माइनिंग से काम से जुड़ा हुआ है।

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