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मनुष्य को भाग्य के अनुसार ही फल मिलता है : हरिराम

6 वर्ष पहले
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सफीदों | समाजसेवीभक्त हरिराम ने कहा कि पूर्व जन्म में अर्जित कर्म को ही भाग्य कहते हैं। कल का कर्म आज का भाग्य है औैर आज का कर्म कल का भाग्य होगा। वे शनिवार को कुरड़ गांव मेेंं गुरु गोरखनाथ आश्रम मेंं श्रद्धालुओं को प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विद्या एवं पुरुषार्थ तो कई बार ठेंगा दिखा जाते हैं। जिससे मनुष्य के मन में यह बात जाती है कि जब भी फल देता है भाग्य ही देता है। विद्या एवं पुरुषार्थ से कुछ भी हासिल नहीं होता है। यदि करीर वृक्ष पर पत्ते नहीं आते तो इसमें बसंत ऋतु का क्या दोष, उल्लू को दिन में दिखाई नहीं देता तो इसमें सूर्य का क्या दोष, विधि द्वारा लिखे गए लेख को कोई नहीं मिटा सकता। उन्होंने कहा कि समुद्र जिसका पिता है लक्ष्मी जिसकी बहन है, ऐसा शंख भी शिक्षार्थी होकर रोता है। अत: यह मानना होगा कि मनुष्य को भाग्य के अनुसार ही फल मिलता है।