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फाइनेंस पर गाड़ी लेकर कर रहा परिवार का गुजारा

6 वर्ष पहले
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सफीदों | थानापरिसर में आत्मदाह करने के प्रयास मामले से क्षेत्र के लोग भी हैरान रह गए। इस घटना की शहर में चारों ओर निंदा की जा रही है। पुलिस के डंडे से बचने के लिए कुलदीप ने काफी कोशिश की, लेकिन किसी पुलिस कर्मचारी का दिल नहीं पसीजा।

रोता हुए कुलदीप ने पुलिस कर्मचारियों के सामने कहा कि साहब, मैं गरीब आदमी हूं। मुझे भी अपने बच्चे पालने हैं। मैं गाड़ी के फाइनेंस की किस्त चुकता करूं या पुलिस वालों को गाड़ी बेगार पर दूं। मैं ईमानदारी के साथ अपना गुजर बसर करना चाहता हूं। उसने अपनी गाड़ी प|ी के जेवरात बेचकर फाइनेंस पर ली हुई है। उसने कहा कि दो दिन पहले ही वह 14,000 रुपए की किस्त भरकर आया है। आए दिन पुलिस वाले उसकी गाड़ी को बेगार पर ले जाते रहते हैं। पहले तो कई बार उसकी गाड़ी बेगार पर जा ही चुकी है और अभी कुछ दिन पहले उसकी गाड़ी पुलिस वालों ने 3 दिन तक रोहतक पीजीआई में खड़ी रखी। आज फिर से पुलिस वाले गाड़ी को बेगार पर ले जाने के लिए खड़े हुए। उसने कहा कि हर रोज की पुलिसिया ज्यादती से वह तंग चुका है, इससे परेशान होकर ही मैंने आत्मदाह करने की कोशिश की है। मुझे ये कदम उठाने के लिए पुलिस कर्मचारियों ने मजबूर कर दिया।

4-4बेटियों का बाप हूं : पुलिसहिरासत में कुलदीप के दिल का दर्द जुबां पर साफ-साफ नजर रहा था। आंखें आंसुओं लिए हुए कुलदीप ने पुलिस कर्मचारियों को बताया कि उसकी 4 बेटियां हैं। उसने बताया कि उसके ऊपर पूरे परिवार को संभालने का जिम्मा है। वह पूरी तरह से गरीबी के दलदल में फंसा हुआ है तथा परिवार का पालन-पोषण करना दूभर हो रहा है और ऐसे में पुलिसिया बेगार देना अब उसके बस की बात नहीं रही है।

सफीदों. चालककुलदीप का भाई सोनू गाड़ी के पास खड़ा।