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गर्भवती महिलाओं का तीन माह के भीतर पंजीकरण कराना जरूरी
महिलाओंको अब गर्भधारण का तीसरा महीना पूरा होते ही अपना पंजीकरण नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र या स्वास्थ्य केंद्र पर करवाना होगा। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में एएनएम आशा वर्करों की जिम्मेदारी तय करते हुए उन्हें अपने इलाके में गर्भवती महिलाओं पर निगरानी रखने के लिए कहा गया है। साथ ही ये निर्देश भी दिए गए हैं कि यदि पंजीकरण करने में देरी होगी तो उसकी ठोस वजह भी पूछी जाएगी।
सरकार द्वारा कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ शुरू किए गए इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग हर तरह की रणनीति बनाकर इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने की कोशिश में जुट गया है। विभाग की और से बनाई गई रणनीति के तहत यदि किसी महिला का किन्हीं कारणों से गर्भ गिरता है या गिरने की नौबत आती है तो संबंधित डॉक्टरों और महिला के परिवार से स्वास्थ्य विभाग गहनता से पूछताछ कर उनकी भी रिपोर्ट तैयार करेगा।
3महीने बाद होता लिंग जांच
स्वास्थ्यविभाग के अधिकारियों के अनुसार गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग परीक्षण तीन महीने के बाद ही संभव होता है। लिंग परीक्षण करवाने वालों पर नजर रखी जाएगी। इसके लिए आशा वर्कर और एएनएम अपने इलाके में समय-समय पर राउंड लगाकर गर्भवती महिलाओं पर निगरानी रखेंगी। ऐसे परिवारों पर अधिक ध्यान रखने के लिए आदेश जारी किए गए है, जिन परिवारों में पहली संतान लड़की है।
इनगांवों में विशेष ध्यान
इलाकेके गांव कारोर, नौंनद, गिझी, सांपला, इस्माइला 11बी, हसनगढ़, भैसरु खुर्द में लिंग अनुपात खराब है। यहां पर लड़कियों की तुलना में लड़कों की संख्या ज्यादा है। विभाग ने इन गांवों में बिगड़े अनुपात पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
लिंग परीक्षण करवाने वालों पर रखी जाएगी गुपचुप तरीके से नजर