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रोहतक और सीएम के गढ़ में निर्दलीय बिगाड़ेंगे समीकरण

7 वर्ष पहले
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सीएमभूपेंद्र सिंह हुड्डा को घेरने के लिए सिर्फ विपक्षी जहां सियासी दाव पेंच लगा रहे हैं। वहीं निर्दलियों ने भी सीएम की राह रोड़े अटका दिए है। अब तक हुए नामांकनों के आंकड़ों के जरिए सीएम सिटी यानी रोहतक विधानसभा और गढ़ी-सांपला-किलोई विधानसभा यानी सीएम के गढ़ में निर्दलीय भी समीकरण बिगाड़ने के लिए चुनावी अखाड़े में कूद गए हैं। सिर्फ दो हलकों से ही 20 निर्दलीय उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र भरा है। इनमें रोहतक विधानसभा से 10 और गढ़ी-सांपला किलोई विधानसभा से भी 10 उम्मीदवार मैदान में हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों में से अधिकतर अपने जातिगत समीकरणों का हवाला देते हुए जीत भी पक्की मान रहे हैं। ऐसे में बड़े राजनीतिक दलों की मुश्किलें भी बढ़ गई है।

सबसे कम निर्दलीय कलानौर से

जिलेके चार हलकों में सबसे कम 6 निर्दलीय उम्मीदवार कलानौर से मैदान में उतरे हैं। इससे थोड़ा आगे बढ़कर 8 आजाद उम्मीदवारों ने महम से भी दम दिखाया है। हालांकि अब देखना ये है कि एक अक्टूबर तक कितने आजाद उम्मीदवार बैठते हैं और कितने चुनाव लड़ने की हिम्मत जुटा पाते हैं।

अब तक उतरे आजाद उम्मीदवार

साल-कलानौर महम रोहतक किलोई हसनगढ़

2000-06 06 04 09 03

2005- 02 05 03 05 हलका खत्म

2009- 02 07 05 03 हलका खत्म

नोट: आंकड़ें चुनाव आयोग की ओर से जारी।

शुरू हुआ मान-मनौव्वल का दौर

नामांकनकी प्रक्रिया के अंतिम दिन खासतौर से निर्दलीय उम्मीदवारों की तादाद सबसे ज्यादा रही। इनमें कई रूठे हुए तो कई अंतिम समय तक सीट बदले जाने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन पार्टी की ओर से कोई पहल होती देख निर्दलीय ही मैदान में कूद पड़े हैं। कुल 75 उम्मीदवारों में से 34 उम्मीदवार आजाद नामांकन दाखिल करा चुके हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों के मैदान में आते ही अब उन्हें मनाने और बिठाने का दौर भी शुरू हो गया है।