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फैक्टरी में वेल्डिंग करते वक्त धमाके में जिंदा जला मजदूर, बिना सुरक्षा उपकरणों के करवाते थे काम, कमजोर तेल टैंक को लेकर दी थी चेतावनी, नहीं बदलवाया

भास्कर तत्काल जिलेमें 1100 फैक्टरियां, 2 हजार बड़े संस्थान, फायर एनओसी सिर्फ 260 के पास भास्कर न्यूज | सांपला/रोहतक...

Dainik Bhaskar

Jan 11, 2018, 09:30 AM IST
फैक्टरी में वेल्डिंग करते वक्त धमाके में जिंदा जला मजदूर, बिना सुरक्षा उपकरणों 
 के करवाते थे काम,
भास्कर तत्काल

जिलेमें 1100 फैक्टरियां, 2 हजार बड़े संस्थान, फायर एनओसी सिर्फ 260 के पास

भास्कर न्यूज | सांपला/रोहतक

कुलतानारोड पर आरएसपी टायर रिसोलिंग फैक्टरी में बुधवार को तेल टैंक में लगी आग में एक मजदूर के जिंदा जलने से व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। फैक्टरी में मजदूरों के पास तो फायर सेफ्टी उपकरण थे और ही आग बुझाने के लिए पर्याप्त अग्निशमन यंत्र। केवल एक अग्निशमन यंत्र था, लेकिन उसे चलाना कोई नहीं जानता था। फैक्टरी में संवेदनशील कार्य होने के बावजूद आसपास पानी का इंतजाम नहीं था। मजदूरों ने कई बार मालिक को कमजोर तेल टैंक को बदलवाने के लिए चेताया था, लेकिन उसे बदला नहीं गया। छह माह पहले ही खोली गई फैक्टरी के मालिक ने फायर एनओसी भी नहीं ली थी। प्रशासन भी इस कदर आंखें मूंदकर बैठा है कि जिले में अवैध रूप से चल रहीं फैक्टरियों संस्थानों को लेकर कोई जांच नहीं की जाती। फैक्टरी में मजदूर दम तोड़ते हैं और पैसे के दम पर मामले को दबा दिया जाता है। प्रशासन भी रसूखदारों के दबाव के चलते केवल शिकायत मिलने का इंतजार करता रहता है।

टायरोंमें आग लग जाती तो होता बड़ा हादसा

अन्यफैक्टिरयों में काम करने वाले मजदूरों का कहना था कि यदि एक बार वहां पड़े टायरों के बड़े ढेर में आग लग जाती तो बड़ा जान-माल का नुकसान होता। गनीमत यह रही कि वहां तेल निकालने के लिए रखे टायरों ने आग नही पकड़ी। पुलिस ने फैक्टरी मालिक पर केस दर्ज कर लिया है।

1. सभीबहुमंजिला भवनों में कम से कम तीन मीटर चौड़ी सीढ़ियां और इसी के आसपास लिफ्ट होनी चाहिए।

2.4मीटर चौड़ा रैम्प बनाने के साथ हर मंजिल पर प्रवेश और निकास के लिए तीन मीटर चौड़े अलग-अलग रास्ते होने चाहिए।

3.पूरीइमारत स्प्रिंकलर सिस्टम से लैस होनी चाहिए।

4.हरतल पर कम से कम पांच हाइड्रेंट होने चाहिए।

5.फ्लेमऔर स्मोक डिटेक्टर के साथ अलार्म सिस्टम का पैनल लगा होना चाहिए।

6.फायरफाइटिंग के लिए कम से कम दो साल का प्रशिक्षण प्राप्त कर्मचारी भी तैनात होना चाहिए।

दिल्ली के फैक्टरी मालिक के खिलाफ केस दर्ज

बिहारनिवासी वीरेंद्र ने पुलिस में फैक्टरी मालिक पंकज पर केस दर्ज करवाया है। उसका कहना है कि वह अपने बेटे मुन्ना राम के साथ फैक्टरी के क्वार्टरों में ही रहता है। फैक्टरी मालिक की लापरवाही से हादसा हुआ। हमने पहले ही कमजोर टैंक बदलवाने को कहा था।

चश्मदीद बोला, टैंकरफटने के बाद धुआं फैल गया था, घुट रहा था दम

बुधवारदोपहर ढाई बजे पुराने टायरों को उबाल तेल निकालने वाले टैंक के पास से गुजर रही पाइप लाइन पर वेल्डिंग चल रही थी। फैक्टरी में इस दौरान वीरेंद्र, सुनील, मुन्ना, कमल, कौशल, विकास समेत 12 मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक टैंकर फट गया और आग लग गई। धुआं इतना था कि वहां से भागना भी बड़ा मुश्किल था। दम घुटने को हो रहा था। हर ओर चीख-पुकार मची हुई थी। हमें मेन गेट ही नहीं मिल रहा था। मैंने दूसरे साथियों को भी ढूंढने की कोशिश की, लेकिन कोई नहीं मिला। बड़ी मशक्कत के बाद वहां से निकल सका। धुएं से बाहर निकलने के बाद ही होश आया। कुछ देर बाद फायर ब्रिगेड भी गई। फिर आग पर काबू पाने के बाद ही पता चला कि बिहार के सिवान निवासी मुन्ना राम सुनील झुलस गए, जिन्हें करीब चार बजे पीजीआईएमएस लेकर पहुंचा हूं। -वीर बहादुर, चश्मदीद श्रमिक

यह तस्वीर है फैक्टरी की लापरवाही की आग में जिंदा जले नौजवान कमल की

यह तस्वीर आपको विचलित करेगी। आमतौर पर भास्कर ऐसी तस्वीर छापता नहीं है, लेकिन फैक्टरी मालिकों और शासन-प्रशासन की लापरवाही को दिखाने के लिए यह जरूरी है।

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 के करवाते थे काम,
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