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व्यक्ति की आयु हिम्मत जज्बे में बाधा नहीं बन सकती
मनुष्यके पास यदि हिम्मत हो-जज्बा हो तो आयु कामयाबी में बाधा नहीं बन सकती। युवा अवस्था में ही एक अच्छा खिलाड़ी बनने का अवसर मिल सकता है यह कहावत एक 67 वर्षीय एथलीट ने अपने साहस के बल पर झूठी साबित कर दी है।
67 वर्ष की आयु में खेल के प्रति अपना जज्बा दिखाते हुए गांव सोहडी़ के धावक मुंशीराम एशियाई चैंपियनशिप में तीन मैडल जीतकर युवा खिलाडिय़ों के लिए प्रेरणा के स्त्रोत बन गए हैं। अब मुंशीराम वर्ल्ड मास्टर चैम्पियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस एथलीट ने अपनी उपलब्धियों से केवल युवाओं को अपितु बुजुर्गों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।
क्याहै उनकी कामयाबी का राज
24से 27 फरवरी को कोयम्बटूर ‘तमिलनाडु’ में सम्पन्न हुई राष्ट्रीय मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हरियाणा के जिला महेंद्रगढ़ के गांव सोहडी़ ‘सतनाली’ निवासी मुंशीराम शेखावत पुत्र स्व. भंवर सिंह नम्बरदार ने गोल्ड मैडल तथा सिल्वर मैडल जीतकर जिले प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने बताया कि वे प्रतिदिन अपने दिन की शुरूआत सुबह 4 बजे उठ कर शहद मिले दो गिलास पानी पी कर करते हैं। वे सुबह प्रतिदिन सैर करने के साथ-साथ हल्का व्यायाम करते हैं। किसी भी प्रतियोगिता से पहले पूरी तरह तैयारी कर अपनी सहन शक्ति आत्म विश्वास को बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा उनकी कामयाबी के पीछे उनकी सकारात्मक सोच, मां-बाप से मिले अच्छे संस्कार उनके स्टेमिना को बढ़ाने वाला शाकाहारी भोजन है।
स्कूलीसमय से ही था खेलों में रुझान
सतनालीके राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 11वीं में पढ़ते समय से ही मुंशीराम पंजाब राज्य वालीबॉल टीम में खेले। मुंशीराम शेखावत ने 1970 में बीए की परीक्षा महेंद्रगढ़ महाविद्यालय से पास कर सीआरपी में हेडकांस्टेबल के पद पर नियुक्त होकर 2004 में कमांडेंट के पद से सेवानिवृत हो गए। पिछले 5 वर्षों में मास्टर एथलेटिक्स राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में 14 मैडल जीत कर अपने देश के लिए इस आयु में भी कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने 6 गोल्ड, 5 सिल्वर 3 कांस्य पदक अर्जित किए हैं। 2009 में हिसार में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में 400 4 गुणा 100 मी. रेस में गोल्ड सिल्वर मैडल जीत चुके हैं। 2009 में ही सिंगापुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 400 4 गुणा 100 मी रेस में गोल्ड कांस्य पदक अर्जित कि