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विनय, उदारता प्रभु भक्ति मिलती है संत सेवा से : तेजस्वी

7 वर्ष पहले
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शाहाबाद|गीता भागवतप्रचार समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवतं कथामृत में वृंदावन से श्रीमन तेजस्वी दास प्रभु ने कहा कि विनय, उदारता और प्रभु भक्ति ये तीनों ही संत सेवा से मिलते हैं। क्योंकि संत का जीवन परमार्थ के लिए है जैसे कि वृक्ष कभी अपने फल स्वयं नहीं खाते और नदी अपना पानी स्वयं नहीं पीती। उसी तरह संत भी पर स्वार्थ में अपना जीवन लगा देते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भगवत गीता अनूठा और रसीला गीत है, जो मानव जीवन को रसीला और संगीतमयी बनाता है। तेजस्वी प्रभु ने बताया कि जहां अशांति है और तनाव है वहां गीता के गीत की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि धन-वैभव मिलना बुरा नहीं। लेकिन जिसके कारण से मिला है उसका ध्यान जरूरी है।