पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • भाषा विचारों को सोचने का माध्यम : सुभाष

भाषा विचारों को सोचने का माध्यम : सुभाष

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
शाहाबाद |आर्यकन्या महाविद्यालय के सभागार में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम हुआ। इसका शुभारंभ मुख्यातिथि कॉलेज की प्राचार्या भारती बंधू ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। प्राचार्या भारती बंधू ने कहा कि आज अपने ही देश में हिंदी की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। हिंदी भारत में संपर्क भाषा का कार्य कर रही है परंतु फिर भी अंग्रेजी हमारी कार्यालय की भाषा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि आज के युवा को हमारी लिपि का संरक्षण भी करना चाहिए। देवनागरी लिपि की स्थिति भी दयनीय है। कहा कि औपचारिक रूप से सभी को हिंदी का प्रयोग करना चाहिए। ताकि भविष्य में हिंदी भाषा की स्थिति में अधिकाधिक सुधार हो सके। कार्यक्रम में लगभग 20 छात्राओं ने कविता पाठन भाषण प्रस्तुत किए। मौके पर संदीप कौर, सुनीता गुप्ता, उत्तम प्रसाद शास्त्री सहित हिंदी विभाग की अध्यापिकाएं और छात्राएं उपस्थित थीं।

कुरुक्षेत्र |कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के जनसंचार और मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान में शनिवार को हिंदी दिवस मनाया गया। मौके पर हिंदी विभाग के प्रो. सुभाष ने कहा कि हिंदी भाषा माध्यम नहीं है बल्कि यह कारण भी है और विचार भी है। भाषा विचारों को सोचने का माध्यम है।

विचारों का चिंतन किस प्रकार होता है उसका माध्यम भाषा है। भाषा ज्ञान का पैमाना है। भौतिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को इससे आगे आना चाहिए कि भाषा मात्र संचार का साधन नहीं है। भाषा अदृश्य है स्वयं को अभिव्यक्त करने के लिए भाषा की जरूरत होती है। रेडियो उदघोषक अनिल भटनागर ने कहा कि रेडियो वह माध्यम है जिसने हिंदी भाषा को जन-जन की भाषा बनाने का काम किया। मीडिया के क्षेत्र में काम करने वाले विद्यार्थियों में भाषा संस्कार होना बेहद जरूरी है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे भाषा का ज्यादा से ज्यादा का प्रयोग करें। ताकि वे उसमें व्यवहारशील बन सकें। उन्होंने कहा कि देश में जिस तरह से एफएम रेडियो का विकास हुआ है। एफएम के उदघोषक जिस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं वह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि युवा किसी भी माध्यम में काम करें लेकिन भाषा का सही प्रयोग करना सीखें। संस्थान के निदेशक प्रो. एसएस बूरा ने कहा कि संस्थान हर वर्ष हिंदी दिवस को मनाता है। इसका उद्देश्य भावी मीडिया कर्मियों में भाषा के प्रति संवेदनशीलता पैदा करना है। उन्होंने कहा कि साहित्य भाषा से ल