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भक्ति में बुद्धि और भाव का तालमेल जरूरी : वेदांतानंद

7 वर्ष पहले
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शाहाबाद |श्री कृष्णकृपा प्रचार समिति द्वारा श्रीमद् देवी भगवती बाला सुंदरी मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में गीता मनीषी स्वामी वेदांतानंद महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति करते हुए बुद्धि भाव का तालमेल जरूरी है। जहां अकेले भाव से भगवान को पाना असंभव है। वहीं अकेले बुद्धि से ही भगवान को प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसीलिए गीता के 10वें अध्याय के आठवें श्लोक में बुद्धिभाव समंविता शब्दों से यह बात सिद्ध की गई है कि बुद्धि और भाव के मेल से की गई भक्ति से ही परमात्मा को पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रभु के प्रेम में सब कुछ समर्पण कर देना ही सच्ची भक्ति है। उन्होंने कहा कि भक्ति का लक्ष्य केवल जप करना नहीं बल्कि भगवान को प्रसन्न करना होना चाहिए। भगवान को प्रसन्न करके ही मनुष्य उस अलौकिक आनंद को अनुभव कर सकता है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यातिथि त्रिलोचन हांडा ने दीप प्रज्जवलित करके किया।

प्रसाद की सेवा सतपाल मुखीजा ने की। वेदांतानंद महाराज ने कहा कि साधक को राग और द्वेष से रहित होकर प्रभु भक्ति करनी चाहिए। बिना बुद्धि के केवल भजन करने और नाचने गाने से कुछ नहीं होने वाला। यदि मनुष्य अपना कल्याण चाहता है तो उसे सच्ची भक्ति करते हुए भगवान की शरण में जाना होगा। मौके पर वेद छाबड़ा, रघुनाथ छाबड़ा, ढूंढराज आनंद, सिकंदर लाल उप्पल, रमेश सचदेवा, गुलशन कवातरा, अवनीश गुप्ता, राजू सपड़ा, दीपक हंस, खरैती लाल मक्कड़, संत लाल सिड़ाना, जुगल कालड़ा, सुशील शर्मा, दीपक शर्मा बोबी, जमनादास भारद्वाज, राजेश जैन और कमल शर्मा उपस्थित थे।