स्वयं के भीतर झांकें : मंजू बहन
इधर, भजन संध्या में झूमे श्रद्धालु
शाहाबाद श्रीकृष्ण कृपा प्रचार समिति द्वारा आयोजित गीता भागवत दर्शन में उपस्थित श्रद्धालु।
शाहाबाद|श्रीकृष्ण कृपाप्रचार समिति की ओर से श्रीमद् देवी भगवती बाला सुंदरी मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में गीता मनीषी स्वामी वेदांतानंद ने गीता ज्ञान की अमृत वर्षा की। उन्होंने कहा कि संसार दुखों का घर है और इस संसार में कोई भी सुखी नहीं है। उन्होंने कहा कि इन दु:खों से छुटकारा पाने के लिए मानव को श्रीकृष्ण की शरण में आना पड़ेगा। इसके बाद ही उसके जीवन का कल्याण होगा। कथा का शुभारंभ मुख्य यजमान मुकेश अग्रवाल, यजमान बनारसी दास गाबा ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। प्रसाद सेवा आनंद कौशिक ने की।
गीता भागवत दर्शन के समापन अवसर पर भजन संध्या आयोजित की गई। इसमें कृष्ण नाम रसिक सतीश अनेजा ने भजनों से वातावरण श्रीकृष्णमय बना दिया। अनेजा द्वारा गाए भजन मोहे रंग दे श्याम मोहे अपने ही रंग में रंग दे पर श्रद्धालु मस्ती में झूमने लगे। समिति की ओर से कार्यक्रम में सहायता करने वालों को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। कार्यक्रम के समापन पर भंडारा लगाया गया। इसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मौके पर पवन गर्ग, रघुनाथ छाबड़ा, रमेश सचदेवा, गुलशन कवातरा, ढूंढराज आनंद, वेद छाबड़ा, सिकंदर लाल उप्पल, अवनीश गुप्ता, राजू सपड़ा, दीपक हंस, खरैती लाल मक्कड़, संत लाल सिड़ाना, जुगल कालड़ा, सुशील शर्मा, दीपक शर्मा बोबी, जमनादास भारद्वाज, राजेश जैन और कमल शर्मा उपस्थित थे।
इस्माइलाबाद|ब्रह्माकुमारी मंजूबहन ने कहा कि स्वयं के भीतर झांककर महसूस करें कि हम वास्तव में क्या हैं। हमारे अंदर कौन सी क्षमताएं हैं जिनके द्वारा हम खुद के साथ-साथ समाज का भी हित कर सकें। वे प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में ज्ञान सरिता कार्यक्रम के तहत प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि हमें दर्पण बनना है, खिड़की नहीं, क्योंकि दर्पण में हम स्वयं को देख सकते हैं जबकि खिड़की से दूसरों को देखते रहते हैं। बाहर की दुनिया में वर्तमान में सिर्फ प्रतिस्पर्धा है, निंदा है जोकि हमें खुशी से दूर ले जाती है। परमात्मा की याद ही सभी खजानों की चाबी है और इस चाबी को हर समय कार्य में लगाओ। उन्होंने कहा कि किसी के अवगुण को दूसरों के सामने वर्णन नहीं करना चाहिए। क्योंकि वर्णन करना