\"मन ही बंधन और मन ही मोक्ष का कारण\'
शाहाबाद| गीताभागवत प्रचार समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथामृत में वृंदावन से पधारे तेजस्वी दास प्रभु ने कहा कि इस जीवन को प्राप्त कर मनुष्य को प्रभु का सिमरन करके मानव जीवन का कल्याण करना चाहिए। गृहस्थ मेें रहकर मानव को सांसारिक वस्तुओं में लिप्त नहीं रहना चाहिए। जब जीव माया की ओर मुख करता है तो वह बंधन में पड़ जाता है और जब कृष्ण की ओर बढ़ता है तो सारे बंधन खुल जाते हैं। उन्होंने कहा कि मन ही बंधन और मन ही मोक्ष का कारण है। यदि जीव मन को सांसारिक वस्तुओं में लगा देता है और माया के मोहपाश में बंध जाता है तो बंधन कहलाता है। यदि जीव मन को संसार से हटाकर अंतरमुखी हो जाता है, इसे प्रभु चरणों में लगा देता है तो वह मोक्ष प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि जब कथा सुनते-सुनते और हरे कृष्ण महामंत्र जपते-जपते मन निर्मल हो जाता है तो उसमें भगवान प्रकट हो जाते हैं मानव जीवन सफल हो जाता है।