71 के बाद हर साल पिघली 266 गीगा टन बर्फ
>दो प्रतिशत बढ़ जाएगा 2050 में ग्लोबल तापमान
भास्करन्यूज|शाहाबाद
रसायनपर्यावरणके क्षेत्र में कई अवार्ड प्राप्त कर चुके अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक डाॅ. कुलदीप सिंह ढींढसा ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन मानव जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा है। यूएन के जलवायु परिवर्तन पर अंतर राजकीय पैनल की पांचवीं रिपोर्ट का खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि असामयिक वर्षा, भयानक बाढ़ और जरूरत से ज्यादा बर्फ का पिघलना इसके संकेत हैं। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों ने पाया है कि जमीन समुद्र का तापमान 1880 से 2012 तक 0.85 प्रतिशत बढ़ा है, जिससे समुद्र का स्तर बढ़ता जा रहा है। 1901 से 2010 तक 0.19 मीटर यानि लगभग आठ इंच बढ़ा है। इसका मुख्य कारण ग्लेशियर की बर्फ का पिघलना है। 1971 से 2009 तक प्रतिवर्ष 226 गीगा टन बर्फ पिघली। जबकि 1993 से 2009 तक 275 गीगा टन प्रतिवर्ष बर्फ पिघली है। बर्फ के पिघलने में लगातार हो रही बढ़ोतरी से समुद्र का स्तर बढ़ा है। इसका सबसे बड़ा नुकसान तटीय इलाकों में रह रही आबादी और टापुओं पर बसे देशों के अस्तित्व की समाप्ति का खतरा है। औद्योगिक क्रांति के बाद वायु मंडल में इन गैसों की मात्रा 40 प्रतिशत तक बढ़ी है। उन्होंने बताया कि 2011 के आंकड़ों के अनुसार औद्योगिक क्रांति के बाद कार्बन डाईआक्साइड 40 प्रतिशत, मिथेन 150 प्रतिशत नाइट्रस ऑक्साइड 20 प्रतिशत तक बढ़ी है।
पृथ्वी होगी चार डिग्री ज्यादा गर्म
डॉ.ढींढसा कहा कि अगर यही वृद्धि दर जारी रही तो 2050 में ग्लोबल तापमान 2प्रतिशत तक बढ़ जाएगा और यदि इसका समाधान नहीं तलाशा गया तो सन 2100 तक पृथ्वी 3.7 से 4.8 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म हो जाएगी, जोकि प्रलय का कारण बनेगी। हालांकि वैज्ञानिकों ने इस दिशा में कार्य करना शुरू कर दिया है लेकिन फिर भी मानव जाति को अपने स्वार्थों को त्यागकर पर्यावरण शुद्धि का विशेष ध्यान रखना होगा ताकि धरती पर हो रहे जलवायु परिवर्तन को रोका जा सके।