पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • मानव जीवन को गुणवत्तापरक बनाना है बायोटेक्नोलॉजी का उद्देश्य : प्रो. पवन

मानव जीवन को गुणवत्तापरक बनाना है बायोटेक्नोलॉजी का उद्देश्य : प्रो. पवन

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
महर्षिदयानंद विश्वविद्यालय के जीवन विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रोफेसर पवन कुमार ने कहा कि बॉयोटेक्नोलॉजी का मुख्य उद्देश्य मनुष्य के जीवन को गुणवत्तापरक बनाना है। बढ़ती हुई जनसंख्या और बदलते जलवायु परिवर्तन की वजह से खाद्यान्नों के उत्पादन में निरंतर कमी रही है और इस कमी को दूर करने के लिए बॉयोटेनोलॉजी वैज्ञानिक निरंतर प्रयासरत है। वह सीडीएलयू में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत के निर्माण में बॉयोटेक्नोलॉजी का विशेष योगदान है। इस विषय के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवन स्वच्छता अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। उद्योग धंधों को भी पर्यावरण के अनुकूल बनाने में बॉयोटेक्नीक का प्रयोग बढ़चढ़ कर किया जाता है। उन्होंने कहा कि उद्योग धंधों के बढ़ने गांव से शहरों में स्थानांतरण होने की वजह से कृषि योग्य भूमि की निरंतर कमी होती जा रही है। उत्पादन तो बढ़ाया जा सकता है लेकिन कृषि योग्य भूमि का विस्तार संभव नहीं है। भारत एक कृषि प्रधान राष्ट्र है और यहां की अधिकतर जनसंख्या गांव में निवास करती है और गांव के विकास में बॉयोटेक्नोलॉजी की अहम भूमिका है। प्रोफेसर पवन ने कहा कि हमारे भोजन में पोषक तत्वों की निरंतर कमी आती जा रही है। इन तत्वों की पूर्ति का कार्य भी बॉयोटेक्नोलॉजी वैज्ञानिकों द्वारा किया जाता है। अनेक प्रकार की बीमारियों से बचने के लिए दवाओं तथा टीकों का विकास भी प्रयोगशालाओं में किया जाता है और जनसाधारण को स्वच्छ स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जाता है।

बायोटेक के समाज पर प्रभाव पर मंथन

सेमिनारके तकनीकी सत्रों में बॉयोटेक्नोलॉजी के समाज पर प्रभाव एवं भावी योजनाओं सहित शोध के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। मंच का संचालन डा. कासिफ किदवई और अल्पना ने किया। मुख्य अतिथि तथा आये हुए मेहमानों का स्वागत सेमीनार के संयोजक प्रोफेसर सुरेश गहलावत ने किया। तकनीकी सत्रों की रिपोर्ट सेमीनार के सहसंयोजक डाॅ. राजकुमार सलार ने प्रस्तुत की। मेहमानों का धन्यवाद विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका डा. प्रियंका सिवाच ने किया। सेमीनार के दौरान अनेक प्रतिभागियों द्वारा पोस्टर भी प्रस्तुत किये गये और डा. विनोद छोकर भरत सिंह विकास हुड्डा कनिष्ठ बतरा के पोस्टर अलग-अलग वर्गों में पहले स्थान पर रहे। इस अवसर पर प्रोफेसर जोगेन्द्र दुहन, प्रोफेसर प्रताप पट्टी, प्रोफेसर एमएल सांगवान, डा. विनय लाठर डा. स्वाती दहिया, डा. कंवलजीत, डा. संजू, डा. मंजू उपस्थित थे।

भारतीय वैज्ञानिकों ने विदेशों में भी लोहा मनवाया

मुरथलसे आये हुए प्रोफेसर जेएस राणा ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि भारत के बॉयोटेक्नोलॉजी वैज्ञानिकों ने विदेशों में भी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अनेक भारतीय वैज्ञानिक विश्व भर की प्रयोगशालाओं में सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इस क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं।

सिरसा| सीडीएलयू में बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन मुख्यअतिथि प्रोफेसर पवन कुमार मां सरस्वती की प्रतिभा पर पुष्प अर्पित करते हुए।

सिरसा | शरीरमें कीटोन बॉडी का स्तर बढ़ने से तंदुरुस्ती बनी रहती है। केवल सेहत ठीक रहती बल्कि छोटे मोटे रोग भी स्वत: खत्म होने लगते हैं और रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति बनी रहती है। यह कहना है अमेरिका के येल्स स्कूल ऑफ मेडिसन के प्रोफेसर वीडी दीक्षित का। उन्होंने कहा कि मनुष्य की उम्र बढ़ने के साथ साथ ही विभिन्न तरह की बीमारियां भी होने लगती हैं। शरीर के विभिन्न अंगों में सूजन होने लगती है। उस सूजन से दर्द भी महसूस नहीं होता लेकिन अंदरुनी तौर से वह शरीर के अन्य कोशिकाओं पर असर डालना शुरू कर देती है जिससे शरीर में इम्यून सिस्टम बिगड़ने लगता है। दिमाग से न्यूट्रान पदार्थ खत्म होने लगता है जिससे सोचने की शक्ति भी कमजोर होने लगती है। दिल पर यह शरीर की किसी अंग की हड्डी पर भी असर हो सकता है और उसमें भी सूजन आने लगती है। उन्होंने कहा कि अब बड़ा सवाल यह है कि इसे रोका कैसे जाए। इस पर काफी रिसर्च हो रही है। शरीर में कीटोन बॉडी का स्तर बढ़ाने के लिए जितना नॉर्मल खाते हैं उससे 15 या 20 फीसदी कम खाना चाहिए। कम से कम दो साल तक ऐसे करने से फायदा होगा। कैलोरी भी कम करनी होगी।

खबरें और भी हैं...