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मुआवजे की मांग को लेकर अड़े किसान,सरकार विरोधी लगाए नारे

5 वर्ष पहले
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खराब हुई फसलों के मुआवजे, बिजली के दामों में कमी और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की मांगों को लेकर किसान अड़े रहे। लघुसचिवालय में शनिवार को किसानों का धरना जारी रहा आैर किसानों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। अब किसानाें ने सोमवार को सरकार का पुतला फूंकने का फैसला किया है। हरियाणा किसान मंच के बैनर तले लघु सचिवालय परिसर में धरने पर किसान डटे रहे। वैज्ञानिक डाॅ. कुलदीप सिंह ढींढसा भी किसानों को समर्थन देने पहुंचे। उन्होंने किसानों की समस्याओं पर चिंता जताते हुए सरकार से मुआवजे का वितरण अविलंब करने की मांग की। डा. ढींढसा ने कहा कि किसानों की सभी मांगें जायज हैं। जितनी जल्दी मुआवजा मिलेगा उतनी ही तेज गति से किसान अगली फसल के लिए पूरी मेहनत से तैयारी में जुटेगा। किसान को बचाने के लिए खेती को उन्नत करना जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा फसल बीमा योजना की घोषणा का स्वागत किया और इसे किसानों के लिए फायदेमंद बताया। डाॅ. ढींढसा ने कहा कि सबसे पहला काम खराब हुई फसलों का मुआवजा किसानों की जेब तक पहुंचाने का है। डाॅ. कुलदीप सिंह ढींढसा ने बढ़ रही महंगाई के लिए भी सरकार की नीतियों को जिम्मेवार ठहराया। उन्होंने कहा कि क्रूड ऑयल के दाम में भारी कमी का लाभ आम आदमी तक पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जुलाई 2014 में क्रूड ऑयल का दाम 106 डॉलर प्रति बैरल था, जबकि जनवरी 2016 में 26 डॉलर प्रति बैरल रह गया है। 18 महीने के अंतराल में ही 75 प्रतिशत रेट में कमी हुई लेकिन आम आदमी को इस कमी का कोई फायदा नहीं मिला।

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