सीडीएलयू के तीन प्राध्यापकों को क्लीन चिट
चौधरीदेवीलाल यूनिवर्सिटी में जांच के दौरान सीबीआई अधिकारी के साथ तीन प्राध्यापकों द्वारा अभद्र व्यवहार करने, मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने के मामले का पटाक्षेप हो गया है। इस मामले में तीनों प्राध्यापकों को पुलिस ने क्लीन चिट दे दी है और शहर थाना में प्राध्यापकों पर दर्ज विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामले को भी रद्द कर दिया गया है।
सीबीआई की डीएसपी नीलम सिंह की ओर से 22 जुलाई 2015 को दी गई शिकायत के आधार पर शहर थाना में 23 जुलाई 2015 को सीडीएलयू के प्राध्यापक डा. रजनीश अहलावत, डाॅ. मुकेश गर्ग अौर डाॅ. सत्यवान दलाल के खिलाफ भादस की धारा 332,353,186,506,34 के तहत सरकारी अधिकारी से अभद्र व्यवहार, सरकारी काम में बाधा, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज किया। बाद में इसकी जांच तत्कालीन एएसपी और वर्तमान में भिवानी की एसपी प्रतीक्षा गोदारा को दी गई। पुलिस जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाई। इसलिए उन्होंने मामला रद्द करने की सिफारिश की। जांच रिपोर्ट के आधार पर उक्त प्राध्यापकों के खिलाफ शहर थाना में दर्ज मामले को रद्द कर दिया गया।
अभद्र व्यवहार करने, मारपीट करने जान से मारने की धमकी देने के थे आरोप
^यह मामला सीबीआई डीएसपी नीलम सिंह चंडीगढ़ द्वारा करवाया गया। इसकी तफ्तीश इंचार्ज हुडा चौकी द्वारा की गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर शहर थाना एसएचओ सुभाष चंद द्वारा अखराज (कैंसिल) लिखी जा चुकी है।’’ थानाशहर, सिरसा (जारी हुए पत्र अनुसार)
हसब आमद दरखास्त के मजबूरन से सरेदस्त जुर्म 332,353,186,506,34 भादस का होना पाया जाने पर मुकद्दमा दर्ज रजि. किया गया तथा मुकद्दमा हजा की तफ्तीश एसएसआई बनवारी लाल इंचार्ज चौकी हुडा द्वारा अमल में लाई गई। दौराने तफ्तीश घटना स्थल का मुलाहजा किया गया तथा बयानात गवाह लिखे गए। इसके बाद मुकद्दमा हजा की तफ्तीश एसएसआई अशोक कुमार द्वारा अमल में लगाई गई। इस दौरान दिनांक 19.9.2015 को नामजद आरोपी डा. सत्यवान दलाल डाॅ. रजनीश अहलावत हाजिर चौकी आए जिनको मुकद्दमा हजा में शामिल तफ्तीश करके पूछताछ की गई। जिन्होंने एक आदेश माननीय हाई कोर्ट पेश किया जिसमें माननीय हाईकोर्ट द्वारा नामजद आरोपीगण की अंतरिम जमानत मंजूर की है तथा आरोपियों को जांच में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। जिनको बाद में शामिल तफ्तीश करके फारिग किया गया। अभियोग का सत्यापन प्रतीक्षा गोदारा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिरसा द्वारा किया गया। सत्य यापन के दौरान प्रथम सूचना रिपोर्ट में लगाए गए दुर्व्यवहार करने, सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने जान से मारने की धमकी देने के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदया द्वारा अभियोग में निरसन रिपोर्ट प्रेषित करने के निर्देश दिये हैं।
(जैसाकि पुलिस रिपोर्ट में लिखा है।)
ये है मामला
सीडीएलयूमें कार्यरत प्राध्यापकों के बीच चल रहे विवाद को लेकर मामला उच्च न्यायालय पहुंचा तो न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश जारी किए। सीबीआई की ओर से जांच की जिम्मेदारी डीएसपी नीलम सिंह को दी गई। सीबीआई अधिकारी जांच करने के लिए पिछले वर्ष सीडीएलयू पहुंची। इस दौरान जांच अधिकारी नीलम सिंह की किसी बात को लेकर तीन प्राध्यापकों से बहस हो गई। बाद में 22 जुलाई 2015 को सीबीआई की डीएसपी ने पुलिस को शिकायत दी। शिकायत में कहा गया कि बयान नोट करने के लिए तीन प्राध्यापकों डा. रजनीश अहलावत, डाॅ. मुकेश गर्ग और डाॅ. सत्यवान दलाल को बुलाया गया। आरोप लगा था कि इस दौरान उक्त तीनों ने सीबीआई टीम के साथ अनावश्यक तर्क दिए। इतना ही नहीं इनका उक्त प्राध्यापकों ने अभद्र व्यवहार किया और धमकी भी दी। इस आधार पर तीनों प्राध्यापकों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ।