पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • 24 हजार िनकालने की छूट मिली तो खाली हुए एटीएम

24 हजार िनकालने की छूट मिली तो खाली हुए एटीएम

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नोटबंदी के तीन माह बाद

रिजर्वबैंक ऑफ इंडिया ने बेशक एक दिन में एटीएम से साढ़े चार हजार रुपये निकालने की सीमा खत्म कर 24 हजार रुपये कर दी है लेकिन इसके बावजूद ज्यादातर एटीएम से ग्राहकों को पर्याप्त कैश उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। नोटबंदी के तीन माह बाद भी एटीएम के ये हालात देख ज्यादातर लोग विशेषकर वेतनभोगी अधिकारी और कर्मचारी खासे परेशान हो रहे हैं। वे अपने वेतन से 24 हजार रुपये एटीएम के जरिए लेने जाते हैं तो एटीएम पहले से ही ड्राई अवस्था में पाया जाता है।

वैसे भी फरवरी का पहला हफ्ता वेतनभोगियों के लिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी हफ्ते में उनके विभाग से वेतन उनके बैंक अकाउंट में आते हैं। बैंक में जाने की बजाय ज्यादातर वेतनभोगी एटीएम से ही वेतन राशि निकालने के लिए कतार में लगते हैं। लेकिन जब उनकी बारी आती है तब तक तो एटीएम में कैश खत्म हो चुका होता है। जल्दबाजी में जब दूसरे एटीएम की चौखट पर जाते हैं तो वहां एटीएम पहले से ही कैश आउट की स्थिति में होता है। दरअसल, नोटबंदी के तीन महीने बाद भी ज्यादातर बैंक करंसी की डिमांड पूरी करने में सक्षम नहीं हुए हैं। इस बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से विड्राल की सीमा बढ़ाए जाने से ट्रांजेक्शन का लोड और बढ़ गया है। हफ्ते में सिर्फ एक बार ही बैंक प्रबंधन एटीएम में कैश डालता है और जैसे ही कैश एटीएम में डाला जाता है तो वह दोपहर तक खाली भी हो जाता है। कमोबेश ऐसी स्थिति पिछले एक हफ्ते से शहर के अंबेडकर चौक, बेगू रोड और डबवाली रोड पर स्थित एसबीआई के एटीएम की पाई गई है।

100और 500 के नए नोटों की भी कमी

हैरतकी बात तो यह है कि ज्यादातर बैंकों में 100 अौर 500 के नए नोटों की भी भारी कमी है। यही कारण है कि बैंकों से लेकर एटीएम तक 2000 रुपये के ही नए नोट मिल पा रहे हैं और वे भी तब जब बैंक अथवा एटीएम के पर्याप्त कैश पड़ा हो तब अन्यथा वह भी नहीं मिलते। ज्यादातर लोग बड़े नोट लेने से बचना भी चाहते हैं ताकि चिल्लर की समस्या झेलनी पड़े। युवाओं की मानसिकता यह है कि एक बार में दो हजार रुपये निकालने पर खर्च भी अधिक हो जाते हैं।

बाजारमें भी चल रही है चिल्लर की किल्लत

बाजारमें भी फिलहाल चिल्लर की किल्लत बनी हुई है। दाे हजार के नोट पर 200 रुपये का पेट्रोल या डीजल लेने पर पेट्रोल पंप के संचालक या कारिंदे पेट्रोल अथवा डीजल देने से मना कर देते हैं। होटलों में भी दो हजार का नोट देख कॉर्ड से पेमेंट करने को कहा जाता है। ज्यादातर बैंकों की ओर से एटीएम में 100 और 500 के नोट भी कम मात्रा में ही डाले जा रहे हैं। एटीएम से पर्याप्त मात्रा में रुपये ने मिलने से ज्यादातर लोगों के जरूरी काम भी प्रभावित होने लगे हैं। बस स्टैंड के पास स्थित एटीएम से रुपये निकलने पर रोजाना सिरसा से फतेहाबाद जाने वाले कर्मचारी राजेश को अपने किसी दोस्त से उधार रुपये लेकर यात्रा करनी पड़ी। मोबाइल बिल जमा कराने के लिए छात्र अरविंद चार एटीएम में जा आया लेकिन जब रुपये नहीं मिले तो वह बिल भी नहीं भर सका और मोबाइल कनेक्शन डिस्कनेक्ट हो गया।

हर हफ्ते डाला जा रहा है एटीएम में कैश

^हरहफ्ते एटीएम में कैश डाला जा रहा है। लेकिन अब चूंकि विड्राल की सीमा बढ़ा दी गई है जिसकी वजह से एटीएम का कैश भी जल्द ही खत्म हो जाता है क्योंकि जो लोग पहले एटीएम पहुंच जाते हैं वे कैश निकाल ले जाते हैं। ट्रांजेक्शन लोड बढ़ जाने की वजह से एटीएम का कैश भी जल्द खत्म हो जाता है। इस वजह से उन लोगों को परेशानी हो सकती है जो कैश खत्म होने के बाद एटीएम से रुपये निकालने जाते हैं। आरपीगर्ग, सीनियर मैनेजर, भारतीय स्टेट बैंक, मुख्य शाखा, सिरसा

भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा की एटीएम में कैश होने पर बाहर बैठा गार्ड और दूसरे एटीएम पर ट्राई करते लोग।

खबरें और भी हैं...