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बिजली निगम में आग, आरटीआई का रिकॉर्ड जला
ट्रांसफार्मर पर गिरी छत, बिजली आपूर्ति ठप
शुक्रवारमध्य रात्रि आग लगने के कारण मुख्य बिजलीघर के आरटीआई का पूरा एकाउंट ब्रांच का 20 फीसदी रिकार्ड, मेन सर्वर और लाखों का समान जलकर राख हो गया। आग शार्ट सर्किट से लगी। आग इतनी भीषण थी कि दमकल विभाग की गाड़ी को आग पर काबू पाने के लिए करीब 2 घंटे का समय लगा। उधर जब इस मामले में अधिकारियों मौके पर मौजूद चौकीदार से बात की गई तो कोई संतुष्टिजनक जवाब नहीं दे पाया। अधिकारियों का कहना है कि पुराना रिकार्ड जला है। मगर शहर के आरटीआई कार्यकर्ता संदेह जताते हुए कह रहे है कि इस रिकॉड को साजिश के तहत जलाया गया है। वहीं पूरे सर्कल कार्यालय के अंदर पांच चौकीदार है जिन्हें एक घंटे बाद आग लगने का पता चला।
बिजली निगम के सर्कल कार्यालय में सिटी डिवीजन के कार्यालय में स्थित आरटीआई ब्रांच में शुक्रवार रात्रि आग लग गई। इससे ब्रांच में पड़ा फर्नीचर, एक कंप्यूटर सेट आरटीआई संबंधी, उपभोक्ता शिकायत पत्रों का रिकॉर्ड जलकर राख हो गया। कार्यकारी अभियंता एमएल सुखीजा ने बताया कि रात्रि 12 बजकर 30 मिनट पर फोन आया कि उनके कार्यालय में आग लग गई। वो फौरन बिजलीघर पहुंचे, तब तक पुलिस दमकल विभाग की गाड़ी मौके पर पहुंच चुकी थी।
शहर के आरटीआई कार्यकर्ता करतार सिंह ने बताया कि यह आग लगी नहीं लगाई गई है। विभाग ने साजिश के तहत रिकॉर्ड को जलाया है। शहर के एक कांग्रेसी नेता के बेटे ने 2009 में बिजली लाइन माधोसिंघाना से मल्लेका तक डाली थी। मगर आज तक वह लाइन चालू नहीं हो पाई। बिजली लाइन बिछाने के नाम पर घपला किया गया।
साजिश के तहत जलाया गया रिकार्ड
फ्यूट सिस्टम नहीं था
सबसे पहले आग का पता वहां सो रहे चौकीदार दीवान सिंह को लगा। उसने इसकी जानकारी बिजली सुविधा केंद्र̵ में दी। चौकीदार ने हिचकिचाते हुए बताया कि वो इसी कार्यालय के बाहर वाले कमरे में सो रहा था रात्रि करीब साढ़े 12बजे उसने छत के ऊपर से धुआं उठता हुआ देखा। जिसके बाद उसने बिजली सुविधा केंद्र में सूचना दी।
विभाग की लापरवाही यहीं से पता चलती है कि इतने बढ़े विभाग में एक भी अग्निश्मन यंत्र नहीं है। करीब दो एकड़ में फैले विद्युत विभाग के मुख्य कार्यालय होने के चलते यहां पिछले 76 वर्षों का जरूरी रिकार्ड लाखों रूपये के उपकरण मौजूद है। इसके अतिरिक्त विभिन्न कार्योलय में दर्जनों कर्मचारी भी कार्यरत है। इस स