अस्तित्व बचाने का भी संकट: कुठियाला
विश्वमें साम्यवाद, पूंजीवाद और समाजवाद जैसी व्यवस्थाएं असफल हो चुकी है। 7000 से ज्यादा लोग हर रोज व्यवस्था संघर्ष के चलते काल के ग्रास में समा जाते हैं। एकात्म मानव दर्शन ही इस त्रासदी का एकमात्र सही विकल्प है। यह बात माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो. बीके कुठियाला ने कही। वे चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय में पंचनद शोध संस्थान में आयोजित वार्षिक बैठक गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। विश्वविद्यालय के सेमिनार हाल में पंचनद अध्ययन केंद्र की देखरेख में हुए इस कार्यक्रम के दौरान प्रो. कुठियाला ने कहा कि वास्तव में सामूहिकता में ही जीवन है।
एकात्म बोध इसी सामूहिकता की बात करता है। वर्तमान में मानव मैं और मेरा में उलझ कर रह गया है। इससे अनगिनत समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। मनुष्य के सामने अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि एकात्मकता के आधार आशा, प्यार, विश्वास और शांति से ही वर्तमान समस्याओं का निराकरण संभव है। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. वेद बेनीवाल ने की। डा. बेनीवाल ने कहा कि हमें प्रकृति के नियमों के अनुसार जीवन यापन करना चाहिए। यही एकात्म दर्शन है। यह लंबे समय तक आनंद प्रदान करता है, बाकी सब आनंद क्षणिक होते हैं। गोष्ठी के विशिष्ट अतिथि ऋषि गोयल ने भी अपने विचार सांझा किए। कार्यक्रम के संयोजक डा. डीपी वार्ने गुरदीप सैनी ने सभी के प्रति आभार जताया। इस मौके पर डा. दिलबाग सिंह, ओमदा लांबा, सुमेर सैनी, रमेश हंस, प्रो. अमित सांगवान, डा. सेवा सिंह बाजवा, दिप्ती धर्माणी, सीताराम खत्री, नवदीप धुडिय़ा, इकबाल सिंह, अनिल बेरवाल, ललित चुघ, हरबंस सिंह बराड़ आिद मौजूद थे।