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खुशी और गम हमारी जिंदगी के हिस्सा हैं : रविंद्र पुरी

7 वर्ष पहले
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सिरसा | ज़राहंस भी लिया करो। यह बात मनोवैज्ञानिक डॉ. रविन्द्र पुरी ने समाज सेवी संस्था दिशा के प्रांगण में सेमिनार में कही। उन्होंने अध्यापकों प्रशिक्षकों को कहा कि खुशी और गम जिन्दगी के हिस्सा हैं। जब जब भगवान ने पृथ्वी पर जन्म लिया उन्होंने भी वही दुःख सुख भोगे जो मनुष्य भोगता है। जब भी हमारा सामना मुसीबतों से होता है या हमारी इच्छानुसार कार्य नहीं होता तो हम कुंठाग्रस्त हो जाते हैं। ये कुंठाएं हमें शारीरिक मानसिक रूप से बीमार बनाती हैं। हम दुखी रहने लगते हैं और हमारा सारा वातावरण भी नकारात्मक हो जाता है। ऐसे में यदि हम थोड़ा हंस लेते हैं तो मस्तिष्क को संदेश जाता है कि सब कुछ इतना बुरा नहीं चल रहा जितना समझा जा रहा है। डॉ. पुरी ने बताया कि हंसने के दौरान चेहरे की दुखी दिखने की तुलना में कम मांसपेशियां काम करती हैं। इस अवसर पर दिशा के पदाधिकारी गीता कथूरिया सुरेंद्र भाटिया भी उपस्थित थे।