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भगवान शंकर गोपी का रूप धारण कर आए : किशोर
अग्रसेनकॉलोनी के हनुमान मंदिर में श्रीमदभागवत सप्ताह के छठे दिन स्वामी ललित किशोर व्यास ने महामाया रास का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि कृष्ण ने गोपियों की मन की इच्छा को पूर्ण करने के लिए विभिन्न गोपियों के साथ विभिन्न रूपों में महारास की। इसी दौरान जब कैलाश से भगवान शंकर ने इस महारास को देखा तो वे भी आनंदित हो गए और उनसे रहा नहीं गया और एक सुंदर गोपी का रूप धारण कर वे भी रास में शामिल हो गए। जब श्रीकृष्ण ने उनको नई गोपी समझ देखा और पहचान लिया तो भगवान शंकर ने हाथ जोड़कर भेद खोलने की प्रार्थना की और महामाया रास में शामिल हो गए।
उसी स्थान पर गोपेश्वर मंदिर के नाम से स्थान प्रसिद्ध है। कोई भी व्यक्ति सच्चे हृदय से भगवान को याद करता है तो प्रभु उसकी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए दौड़े चले आते हैं। जिस प्रकार कृष्ण रुक्मणि के विवाह के समय हुआ कि रुक्मणि ने मन में कृष्ण से विवाह करने की इच्छा रखी। जब शिशुपाल अपनी बारात लेकर आया तो रुक्मणि ने सच्चे हृदय से कृष्ण को याद किया और ब्राह्मण के द्वारा संदेशा भिजवाया तो कृष्ण अपने भक्त की इच्छा और भावना का सम्मान करते हुए दौड़े-दौड़े आए और रुक्मणि संग विवाह किया।