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श्रवण की मृत्यु के बाद अंधे माता-पिता ने त्यागे प्राण

7 वर्ष पहले
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जनताभवन रोड स्थित रामलीला ग्राउंड में श्री रामा क्लब चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से 65वां श्री रामलीला का मंचन शुरू हुआ। रामलीला महोत्सव में सूफी कलाकार कंवर ग्रेवाल ने कार्यक्रम पेश किया। जिसमें सबसे पहले गीत पहला गणेश मनाय के करूं मैं तेरा ध्यान से शुरूआत की। इसके बाद इश्क बुल्ले नू नचावे यार ते नचणा पेंदा ए, \\\'ना जाईं मस्तां दे बेडे मस्त बना देणगे बीबा गीत गाए तो दर्शक मस्ती से झूम उठे। इससे पहले रामलीला का उद्घाटन सुनीता सेतिया उनके पति राहुल सेतिया ने अध्यक्षता संजय अरोड़ा ने की। क्लब प्रधान अश्विनी बाठला, महासचिव गुलशनने अतिथियों का स्वागत किया।

रामा क्लब डायरेक्टर हाकम राय, सहायक डायरेक्टर विजय ऐलाबादी सीनरी डायरेक्टर संजय तंलगा के निर्देशन में प्रथम दृश्य के रूप में मात-पितृभक्त श्रवण कुमार द्वारा अपने अंधे माता पिता को अपने कंधे पर उठाकर तीर्थ यात्रा करवाते, अंधे माता पिता के लिए सरयू नदी से पानी लाते समय दशरथ के शब्द भेदी बाण से श्रवण की मृत्यु, दशरथ द्वारा उसके माता पिता को पानी पिलाने जाना तथा उनके द्वारा दशरथ को श्राप देना कि पुत्र वियोग में ही उसकी मृत्यु होगी का मार्मिक मंचन किया। मौके पर सोमनाथ, भारत भूषण, राकेश, रमेश, शमशेर, महेंद्र, सुरेश अनेजा, श्याम, मंगतराम, ओमप्रकाश लूना मौजूद थे।

रामलीला में श्रवण कुमार-दशरथ प्रसंग का मंचन करते कलाकार।