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खराब फसलाें का मुआवजा मिलने पर दूसरे दिन भी किसानों का प्रदर्शन

5 वर्ष पहले
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खराबफसलाें का मुआवजा नहीं मिलने से खफा किसानों का लघुसचिवालय समक्ष दूसरे दिन गुरुवार को भी धरना जारी रहा। जिलाभर से एकत्रित हुए किसानों ने दिनभर सरकार विरोधी नारे लगाकर अपनी भड़ास निकाली। इसी कड़ी में बुधवार को भी किसानों ने फसली मुआवजा की मांग को लेकर शहर में रोष प्रदर्शन किया था। नारेबाजी करते हुए सैकड़ों किसान लघुसचिवालय पहुंचें थे। जहां डीसी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की बात कही थी। लेकिन इस दौरान डीसी प्रदर्शनकारी किसानों से ज्ञापन लेने नहीं पहुंची थी। जिसके बाद गुस्साए किसानों ने लघुसचिवालय समक्ष धरना लगा दिया था। जिसे अब फसलों का मुआवजा नहीं मिलने तक किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना में बदलने का एेलान किया है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगों को जल्द स्वीकार नहीं किया गया, तो सरकार को उनके आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। वे धरना स्थल से उठकर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

सरकार जान बूझकर कर रही है देरी

जिलाके विभिन्न गांवों से पहुंचे प्रदर्शनकारी किसान साहबराम ताजिया, जग्गा सिंह, प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा, रणजीत सिंह जाखड़, बलवीर सिंह गुढिया, बनवारी लाल डिंग, गांधीराम, निहाल सिंह, गुरप्रीत सिंह मेहनाखेड़ा धन्ना सिंह ने कहा कि किसानों को मुआवजा देने में सरकार जान बूझकर देरी कर रही है। किसानों ने कहा कि मुआवजा समय पर नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है। लेकिन सरकार किसानों का मजाक बना रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पूर्व सरकार के नेता किसान हित की बातें करते थे। लेकिन सत्ता मिलने के बाद भाजपा सरकार ने किसानों की सुध नहीं ली है।

किसान दर्जनों बार सौंप चुके है अधिकारियों को ज्ञापन

किसानोंने कहा कि सफेद मक्खी से चौपट हुई नरमा, कपास ग्वार की फसलों के उचित मुआवजा की मांग को लेकर वे इससे पूर्व भी कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। मांगों को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जा चुका है। लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। जिसका खामियाजा लगातार किसानों को भुगतना पड़ रहा है। बार-बार वे धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।

खराब फसलों का जल्द मुआवजा दिलवाए जाने किसानों को 30 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिए जाने, बिजली बिलों में कटौती किए जाने, गरीब किसानों का कर्जा माफ करने, आवारा पशुओं के लिए बाड़ा बनवाए जाने, बिजली की पूर्ण सप्लाई मुहैया करवाने, स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए, मनरेगा के कार्यों को कृषि के साथ जोड़ा जाए दिया जाए मांगे शामिल हैं।

सिरसा | लघुसचिवालय में सफेदमक्खी से खराब हुई फसलों के मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठे हरियाणा किसान मंच के सदस्य किसान।

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