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ईश्वर किसी भी भेष में सकता है: जयकिशोरी

7 वर्ष पहले
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श्रीबाबा तारा चेरीटेबल ट्रस्ट द्वारा रानियां रोड स्थित तारकेश्वर धाम में आयोजित नानी बाई को मायरो के दूसरे दिन शनिवार को कथा का शुभारंभ ट्रस्ट के चेयरमैन गोपाल कांडा ने बाबा तारा के चित्र के समक्ष ज्योत प्रज्जवलित करके की। इस अवसर पर वाचक जयकिशोरी ने नरसी के परमात्मा के प्रति श्रद्धा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नरसी ने भगवान कृष्ण की भक्ति की और हमेशा उन्हें ही संकट के समय याद किया। जब उनके समक्ष अपनी छोटी बहन की ससुराल में भात भरने की स्थिति आई तो भगवान कृष्ण ने ही उनकी मदद की।

कथा वाचक जयकिशोरी ने बताया कि किस प्रकार नरसी प्रभु भक्ति में लीन रहते थे। उनके समक्ष भारी आर्थिक संकट रहा। परिवारजनों ने भी उन्हें ताने दिए। उनका मखौल उड़ाया गया लेकिन उनकी प्रभु के प्रति आसक्ति कभी कम नहीं हुई। उनका विश्वास भगवान कृष्ण पर बना रहा और उन्होंने तमाम कष्ट झेलते हुए भी प्रभु भक्ति नहीं छोड़ी। जयकिशोरी ने श्रद्धालुओं को प्रवचन फरमाते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर के द्वार पर स्वास्तिक का चिह्न अंकित करना चाहिए और घर में भगवान का चित्र रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईश्वर किसी भी भेष में सकते है। हर व्यक्ति को कोई भी कार्य प्रभु का स्मरण करके शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्त के वश में होते है और उनकी कृपा दृष्टि अपने भक्तों पर हमेशा बनी रहती है। इस पर उन्होंने \\\'भक्त के वश में है भगवान भजन भी गाया। कथा के दौरान सुंदर जीवंत झांकियां के माध्यम से कथा को समझाने की कोशिश की गई। कथा में हजारों श्रद्धालुओं ने शिरकत की और कथा का मन से आनंद लिया। इस मौके पर पूरा पंडाल \\\'बाबा तारा की जय, \\\'तारकेश्वर धाम की जय के घोष से गूंजता रहा।

कथा के दौरान बाबा तारा चेरीटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन गोपाल कांडा ने कथा वाचक जयकिशोरी जी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सिरसा का यह सौभाग्य है कि उनके मुखारविंद से श्रद्धालुओं को नानी बाईको मायरो की कथा श्रवण करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि सिरसा धर्मनगरी है और यहां के लोग धार्मिक प्रवृति के है और सिरसा पर सदा भगवान शिव की कृपा रही है। इस मौके पर उनके बाबा तारा कुटिया के मुख्य सेवक गोबिंद कांडा ने बाबा तारा की आरती की।