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राम पुतली आंख की तो आंख के तारे भरत...

7 वर्ष पहले
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शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी

खेवट बोले-हे राम! मुझे भव सागर पार करा देना

बिज्जूवाली रामलीला में वनवास में गए राम

रामलीलापार्क मेें जय श्री राम नगर नाट्यशाला के तत्वावधान में चल रही रामलीला के 7वें दिन पहले शिव परिवार की झांकी निकाली गई। इसके बाद राम-खेवट संवाद, भरत स्वप्न, भरत कैकेयी संवाद तथा भरत मिलाप दिखाया गया। पहले दृश्य में राम, सीता लक्ष्मण के साथ बनवास जा रहे हैं। नदी पार करने के लिए वे खेवट के पास पहुंचते हैं। खेवट उनके चरण धोकर चरणामृत पीता है तथा उन्हें नाव में बिठाकर नदी पार करवाता है। इस दौरान खेवट \\\'देखो रे पहली बार, मेरी जिंदगानी पली, भगवान को करने पार, भक्त की नाव चली´ गीत गाकर राम के प्रति अपनी भक्ति प्रदर्शित करता है। नदी पार करने के बाद जब माता सीता खेवट को उतराई के रूप में कंगन देने लगती है तो खेवट बड़े ही भावुक होकर उन्हें कहते हैं कि मैंने आपको नदी पार उतारा है और जब मैं आपके पास आऊं तो मुझे भव सागर के पार उतार देना। राम खेवट का धन्यवाद कर विदा लेते हैं। वहीं भरत अपने मामा के यहां शयनकक्ष में सो रहे हैं। तभी उन्हें स्वप्न में राम, लक्ष्मण सीता वन में जाते हुए दिखाई देते हैं। बार-बार यही सपना आने पर वे अधीर होकर उठते हैं तथा छोटे भाई शत्रुघ्न को बताते हैं। तभी वहां अयोध्या से एक संदेशवाहक आता है तथा उन्हें अयोध्या बुलाए जाने की सूचना देता है।

इसके बाद भरत अयोध्या पहुंचकर कैकेयी महल में जाते हैं। वहां अपनी माता को सफेद वस्त्रों में देखते हैं। गमगीन होकर अपने पिता के देहांत का कारण पूछते हैं। कैकेयी उसे सारा वृतांत सुनाती है। यह सब सुनकर भरत अपनी माता से नाराज हो जाते हैं और उन्हें भला-बुरा कहते हैं। इसके बाद भरत कौशल्या सुमित्रा के पास जाकर दोनों माताओं से क्षमा मांगते हैं। राम, लक्ष्मण सीता को वापस लाने की बात कहते हैं। कौशल्या सुमित्रा भी भरत के साथ चलने को तैयार हो जाती हैं। इसके बाद वे चित्रकूट पर्वत पर पहुंच जाते हैं।

दूर से भरत सेना को आते देखकर लक्ष्मण भड़क उठता है लेकिन राम उसे शांत करते हैं। भरत जब नजदीक पहुंचता है तो वह राम के चरणों में गिर जाता है और माफी मांगता है। अपनी माताओं को सफेद वस्त्रों में देखकर राम, लक्ष्मण सीता विलाप करने लगते हैं। भरत राम को अयोध्या वापस चलने को कहते हैं लेकिन वचन में बंधा होने के कारण राम जा