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पिछड़ों, दलितों किसानों के प्रखर चिंतक थे ज्योतिबा फूले : रोहलीवाल

7 वर्ष पहले
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शिक्षाके अग्रदूत महात्मा ज्योतिबा फूले की पुण्य तिथि पर स्थानीय विश्वकर्मा धर्मशाला के अंगिरा हॉल में पिछड़ा एवं शोषित वर्ग चेतना मंच द्वारा श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जांगिड़ सभा के पूर्व जिला प्रधान मनीराम रोसावा, महात्मा ज्योतिबा फूले मंच के जिला प्रधान मोती सैनी, नरेश सैनी, सैन समाज के राष्ट्रीय प्रचारक विजय सैन, सतपाल छापरवाल, जीत सिंह जलंधरा, भाल सिंह सुथार, राधेश्याम गुज्जर, स्वर्णकार समाज के प्रदेश महासचिव बलवीर सोनी, नामदेव समाज के प्रधान रघुनाथ राय वर्मा, ओमप्रकाश शीशेवाला, वाल्मीकि महासभा के जिला प्रधान अशोक चौहान ने महात्मा ज्योतिबा फूले को पुष्पांजलि अर्पित की।

उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए पिछड़ा एवं शोषित वर्ग चेतना मंच के संयोजक राजकुमार रोहलीवाल ने कहा कि यूं तो भारत की पावन भूमि पर बहुत-से समाज सुधारक, आचार्य, विचारक, दार्शनिक क्रांतिकारी पैदा हुए हैं परन्तु इनमें से अधिकांश ने जीवन पर्यन्त धर्म, अध्यात्म ज्ञान से सम्बन्धित क्षेत्र में कार्य किया।

ज्ञान की कमी के कारण जब भारत का पिछड़ा, दलित, किसान हजारों वर्षों से बुरी तरह से शोषण का शिकार हो रहा था। ऐसे समय में महात्मा ज्योतिबा फूले ने इस वर्ग पर हो रहे शोषण के विरुद्ध अपने चिंतन से जो जागृति फैलाई तथा टुकड़ों में बंटे भारत में राष्ट्रीय एकता सामाजिक जागृति फैलाई तथा देश को अखंडता के सूत्र में पिरोने का काम किया। माली जाति में जन्मे फूले ने पिछड़ों, दलितों किसानों को शोषण से बचाने के लिए जीवन भर संघर्ष किया। वे कहते थे कि विद्या के अभाव में मति नष्ट होती है, मति के अभाव से नीति नष्ट होती है, नीति के अभाव में गति नष्ट होती है, गति के अभाव से धन नष्ट होता है।

मोती सैनी ने मांग की कि फूले के जन्मदिवस पर सरकार एच्छिक अवकाश की घोषणा करे।

सिरसा। विश्वकर्मा धर्मशाला में महात्मा ज्योतिबा फूले की पुण्य तिथि पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते संयोजक राजकुमार रोहिलीवाल अन्य।