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तारकेश्वर धाम में अंतिम दिन सुनाई नरसी के भात की कथा

7 वर्ष पहले
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श्रीबाबा तारा जी चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा रानियां रोड स्थित तारकेश्वर धाम में चल रही तीन दिवसीय \\\'नानी बाई को मायरो के तीसरे दिन का शुभारंभ कुटिया के मुख्य सेवक गोबिंद कांडा ने पूजा-अर्चना कर किया। इस अवसर पर श्री बाबा तारा चेरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन गोपाल कांडा की धर्मप|ी सरस्वती कांडा ने कहा कि सिरसा संत-महात्माओं की तपोस्थली है। गुरुओं की कृपा से सिरसा शांति और सौहार्द का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि हमें समय-समय पर यहां संत-महात्माओं के प्रवचन और कथा सुनने को मिलती रही है। कथा के अंतिम दिन कथावाचक जयकिशोरी ने नरसी का भात की कथा सुनाते हुए कहा कि नरसी जी एक गरीब अति निर्धन व्यक्ति थे। लेकिन उन्हें अपने प्रभु श्रीकृष्ण जी पर पूर्ण विश्वास था और वो भगवान चरणों में प्रार्थना कर भात भरने के लिए अपनी बहन के ससुराल पहुंच जाते हैं। उन्होंने बताया कि भात भरने के लिए नरसी जी के पास ना पैसे थे और ही कोई सामान। लेकिन नरसी की सच्ची भक्ति को देख भगवान ने उसकी सहायता की और भात भरवाया।

जयकिशोरी ने \\\'कहयो-कहयो बाबा जी साची, मेरो सांवरियो कद आसी भजन सुनाकर सभी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। किशोरी ने कन्या शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि हर बेटी को शिक्षा ग्रहण करवानी चाहिए। क्योंकि लड़की के शिक्षित होने से मायका और ससुराल दो घर शिक्षित बनते हैं। कथा समापन अवसर पर गोपाल कांडा परिवार सहित नरसी जी की भांजी के भात की रस्म अदा की।

कथावाचक जयकिशोरी।

सिरसा। तारकेश्वर धाम में कथा सनने पहुंचे श्रद्धालु।