- Hindi News
- भूखी मर रहीं गायों को मोहल्ले की महिलाओं ने डाला हरा चारा
भूखी मर रहीं गायों को मोहल्ले की महिलाओं ने डाला हरा चारा
धर्मनगरीमें सूखी पराली खाकर और गाद में फंसकर बीमार हुई गाय की करुणामयी पुकार आखिर शहरवासियों ने ही सुनी है। गोशाला में प्रबंधन कमेटी की अनदेखी का शिकार हुई गाय को उसका हक दिलाने के लिए पांच दिन से भूख हड़ताल पर बैठे गो भक्तों की प्रशासन ने तो नहीं सुनी। मगर शहर की सैकडों महिलाओं ने सुन ली। वे रविवार सुबह गाय की दुर्गति का समाचार सुनकर श्री गोशाला पहुंची। उन्होंने गोशाला की टाल से हरा चारा काटा और थैलों में भरकर सूखी पराली खा रही बीमार गायों को खिलाया।
कई दिनों से बिना चारे खड़ी गाय हरा चारा देखकर उसे खाने के लिए टूट पड़ी। गो सेवा करने गोशाला में पहुंची महिलाओं का कहना था कि उन्हें अखबार के माध्यम से पता चला कि गोशाला में गाय को भूखा रखा जा रहा है। उन्हें हरे चारे की बजाए सूखी पराली डाली जा रही है। इसलिए उन्होंने एक-दूसरे से संपर्क किया और गोशाला पहुंची। उनका कहना था कि जब गोशाला के पास हरे चारे की कोई कमी नहीं है तो सूखी पराली क्यों डाली जा रही है। महिलाओं ने कहा कि अब बहुत हो गई प्रधान की मनमानी। वे अब गाय को भूखा नहीं मरने देंगी।
महिलाओंने गोशाला प्रबंधन को नहीं बेचने दिया चारा
अबतक गोशाला की कृषि भूमि पर हरा चारा उगाकर गो भक्तों को मोल देने का कार्य करने वाली प्रबंधन कमेटी के इस धंधे को भी महिलाओं ने बंद करवा दिया। उन्होंने सुबह जाते ही गोशाला की बनाई टाल से हरे के थैले भरे और गाय को हरा चारा डालने के लिए निकलने लगी। इस पर गोशाला के कर्मियों ने पर्ची कटवाने की बात कही।
महिलाओं ने कहा कि तुम्हारे घर से चारा नहीं लेकर आई हैं। गोशाला का चारा है। गोशाला की गाय को खिलाया जाएगा। अब चारा मोल देने का धंधा नहीं चलेगा यहां। बहुत दिन कमा लिए गोशाला के नाम पर रुपये, अब नहीं। यहां बता दें कि गोशाला प्रबंधन कमेटी ने गोशाला के बाहर एक टाल बना रखी है। यहां पर गोशाला की भूमि पर उगाया गया हरा चारा लाया जाता है। उसे काटकर गो भक्तों को 170 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचा जाता है। प्रबंधन कमेटी ने यह धंधा पिछले लंबे समय से चला रखा था। जिसे रविवार को महिलाओं ने बंद करवा दिया।
बोलींजरूरत पड़ी तो भूख हड़ताल पर भी बैठेंगी
पांचदिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सुशील सैनी आनंदस्वरूप सैनी की सुध लेने भले ही अभी तक प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचे हैं। मगर शहर के अलग-अलग मोहल्लों से आई महिलाओं ने उनकी सुध ली। गोशाला पहुंची रोशनी, संतरो, शीला, संतोष, कौशल्या, तुलसी, कमलेश, मैना, चंद्रो, रजनी, पार्वती ने कहा कि वे अब गाय को भूखा नहीं मरने देंगी। जरूरत पड़ी तो वे भी यहां पर भूख हड़ताल पर बैठेंगी। महिलाओं ने भी मांग करते हुए कहा कि डीसी को शीघ्र इसमें हस्तक्षेप करके प्रधान को हटाना चाहिए और मामले की जांच करवानी चाहिए।
श्री गोशाला में भूखी गायों को हरा चारा डालती महिलाएं।
भूख हड़ताल पर बैठे दो लोग नहीं स्वस्थ
गोशालाके मुख्य द्वार के आगे धरने भूख हड़ताल पर बैठे आनंदस्वरूप कैंसर का इलाज करवा रहे हैं। वहीं सुशील शुगर की बीमारी से जूझ रहे हैं। उनका रविवार को मेडिकल करवाया। जिसमें दोनों का 9 और 7 किलो वजन घट गया है। डॉ. एमएम तलवार ने बताया कि दोनों की हालत नाजुक होती जा रही है।
बीमार कमजाेर गाय तीन और मरीं
पिछलेपांच दिनों में 15 गाय मरने के बाद शनिवार की शाम को दो और रविवार की सुबह एक गाय भी मौत का शिकार हो गई। इस प्रकार 6 दिनों में 18 गाय मर चुकी है। रोजाना मर रही गाय के बाद भी अभी तक प्रशासन इस और सुध नहीं ले रहा है। ही कोई प्रबंधन कमेटी कदम उठा रही है।
ठेकेदार अधिकारी नहीं ले रहे सुध
कथितरूप से खुद को गो सेवा करने के ठेकेदार बताने वाले लोग पांच दिनों में एक बार भी बीमार गाय की सुध लेने नहीं पहुंचे। कोई समिति बनाकर, कोई संघ बनाकर गोसेवा के नाम पर प्रशासन राजनेताओं से बड़े-बड़े चंदे मांगने वाले आखिर इस संकट की घड़ी में कहां छिपे बैठे हैं। गोसेवा के नाम पर बड़ी बातें करके खुद को सच्चा गोभक्त बताने वाले इन ठेकेदरों में से एक भी भूख हड़ताल पर बैठे लोगों के पास नहीं पहुंचा और ही बीमार गाय की सुध ली। वहीं प्रशासनिक अधिकारी भी अभी तक इस मसले पर गंभीर नहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं।
महिलाओं की अपील: गायों की जिंदगी बचाने पहुंचें गोशाला
गोशालामें पहुंचकर गाय की सेवा करने आई महिलाओं ने शहर की अन्य महिलाओं से भी अपील की है। उन्होंने कहा कि अधिक-अधिक महिलाएं गोशाला पहुंचे। यहां आकर बीमार गाय की सेवा करें। उन्हें हरा चारा खिलाएं। जिससे ये गाय शीघ्र ठीक हो जाए। यहां बता दें कि करीब 50 से अधिक गोशाला में कमजोर गाय हैं। वहीं दो दर्जन के करीब गाय की मौत और जिंदगी के बीच जूझ रही है। इसलिए शहरवासियों को वहां पहुंचकर उनकी देखभाल करनी चाहिए।