सेफ्टी टैंक में गिरने से बच्चे की गई जान
गांवगुडियाखेड़ा में सोमवार को टॉयलेट वाले सेफ्टी टैंक में गिरे 5 वर्षीय अंकित पुत्र सुरेश श्योराण को ढूंढने के लिए ग्रामीणों और परिजनों ने चार घंटे तक रात्रि को गांव का कोना-कोना छान मारा। मगर अंकित का कोई सुराग नहीं लग पा रहा था। हर किसी की जुबान पर तरह-तरह के सवाल रहे थे।
बच्चे को लेकर गांव में भय इतना हो गया था कि अपहरण की आशंका लगाते हुए ग्रामीणों ने गांव में दिहाड़ी मजदूरी करने के लिए बाहर आए लोगों के तंबुओं की भी घेराबंदी कर ली थी। तभी किसी ने सूचना दी कि बच्चा सेफ्टी टैंक में गिरा हुआ है। उसके बाद सभी ग्रामीण मौके पर पहुंचे। टॉयलेट के लिए बनाए गए सेफ्टी टैंक में डूबे हुए मासूम अंकित को गांव के दो लड़कों ने ही बाहर निकाला। उसके बाद परिजनों सहित ग्रामीणों में मातम छा गया, क्योंकि बच्चे को मरे तीन से चार घंटे बीत चुके थे। पुलिस को सूचना दे दी गई।
{सेफ्टी टैंक को लोहे के पतरे से ढक रखा था
{अपहरण की आशंका के कारण बाहर से आए लोगों के तंबुओं की भी घेराबंदी की
सेफ्टी टैंक को लोहे के पतरे से ढकने की लापरवाही ने ली मासूम की जान
मासूमअंकित की मौत होने की वजह 6 फुट से अधिक गहरे सेफ्टी टैंक को लोहे के पतरे से ढककर बरती गई लापरवाही रही। अगर उस सेफ्टी टैंक पर पत्थर या लोहे का ढक लगाकर बंद किया होता तो अंकित आज भी अपने साथियों के साथ वहां खेलता होता। मगर थोड़ी सी लापरवाही और अनदेखी की वजह से वह मासूम हमेशा के लिए अपने परिजनों और साथियों से बिछुड़ गया। अंकित की तरह पहले भी जिले में कई मासूम अपनी जिंदगी गंवा चुके हैं। उसके बावजूद भी लोग इससे सबक नहीं ले रहे हैं।
सोमवार रात को करीब आठ बजे देखा सेफ्टी टैंक में, ग्रामीणों ने निकाला बाहर
जबगांव में चार घंटे तक सभी जगह छानबीन करके लोगों ने आखिर में रात को आठ बजे प्लॉट में खुले पड़े सेफ्टी टैंक को देखा। ग्रामीणों के मुताबिक उसके ऊपर लगाया गया लोहे का पतरा साइड में हटा हुआ था। लोग जब टार्च लेकर उसके पास गए तो वहां अंकित की चप्पल पड़ी थी। चप्पल को देखते ही उसके परिजनों ने जल्दी से सेफ्टी टैंक में देखा। उसमें अंकित का शव उतरा रहा था। उसके बाद उसे गांव के ही युवकों ने बाहर निकाला। उसकी मौत हो चुकी थी।