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बच्चों को एल्बेन्डाजोल गोली खिलाई

6 वर्ष पहले
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राष्ट्रीयकृमि मुक्ति कार्यक्रम के तहत राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में एल्बेनडाजोल गोली खिलाने की डीसी निखिल निखिल गजराज ने शुरूआत की गई। उन्होंने बताया कि अभियान का लक्ष्य बच्चों को पेट की बीमारियों से मुक्त रखना है। उन्होंने कहा कि अगर हम शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे तो हम अपने लक्ष्य को बड़ी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान का मकसद हर बच्चे को स्वस्थ बनाना है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी दिनचर्या में सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। खाना खाने से पहले हाथ धोएं, तथा साफ सुथरे कपड़े पहने, पीने के लिए स्वच्छ पानी का प्रयोग करे। उन्होंने कहा कि अगर हम सफाई रखेंगे तो कई बीमारियों से बच सकते हैं।सिविल सर्जन श्री सुरेन्द्र नैन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को अल्बेनडाजोल दवाई दी जा गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आंगनवाड़ी केन्द्रों में एक से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को सरकारी स्कूलों में 6 से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को यह अल्बेनडाजोल गोली निशुल्क दी जा रही है। उन्होंने बताया कि दवाई लेने से वंचित रह गए बच्चों को 13 फरवरी को भी यह दवाइयां दी जाएगी।

सिविल सर्जन ने बताया कि जो बच्चे किसी भी प्रकार से बीमार है या चिकित्सीय देखरेख में है उन्हें दवाई नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि पेट में कीड़े होने पर शरीर दिमाग का पूर्ण विकास नहीं होता।

कुपोषण और खून की कमी हो जाती है जिससे थकावट हो जाती है। उन्होंने बताया कि पाचन मार्ग, पेट, आंत, जठर और मलाशय की कृमियों से मिलकर पेट दर्द, कमजोरी, डायरिया, भूख लगना, वजन कम होना, उल्टी होना, कुपोषण जैसी बीमारियां होती है। पेट में कीड़े होने पर त्वचा में खुजली लाल होने जैसे एलर्जी संबंधी रोग हो जाते है। उप सिविल सर्जन डाॅ. राहुल ने बताया कि अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा 11 मोबाइल वैन भी लगाई गई हैं।

डबवाली | राजकीयकन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में मंगलवार को नेशनल डि-वार्मिंग डे मनाया गया। इसमें सामान्य अस्पताल के एसएमओ डा. एमके भादू ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की। एएनएम शिंगारी देवी सुषमा कुमारी उनके साथ थी। उन्होंने छात्राओं को पेट की बीमारियों खून की कमी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ये रोग पेट के कीड़ों के कारण होते हैं। उन्होंने इसकी रोकथाम के लिए परहेज दवाओं के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छह महीनों में इस दवा की एक डोज लेनी होगी। अंत में प्रिंसिपल राजकुमार मेहता ने कहा कि यह कार्यक्रम बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया है।