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धर्म कर्म को भूलकर पापों में धंसता जा रहा है मनुष्य: भूषण

6 वर्ष पहले
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स्थानीयमुलतानी कालोनी स्थित भगवान शिव मंदिर में भगवान शिव चेरिटेबल संस्थान के तत्वाधान में महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर आयोजित 28वें वार्षिक महोत्सव श्री महाशिव पुराण कथा ज्ञान यज्ञ के अवसर पर कथा को बढ़ाते हुए व्यास धर्म सम्राट भागवत भूषण स्वामी दीन दयालु पांडे महाराज ने कहा कि मनुष्य के कल्याण में रसना और वासना बाधक है। मनुष्य रसना ओर वासना की पूर्ति के लिए दौड़ता रहा है जैसे-जैसे इन दोनों का उपयोग करता है वैसे ही दोनों की भूख बढ़ती जाती है जो मनुष्य के कल्याण में बाधक होती है तथा मनुष्य अपने धर्म कर्म को भूलकर पापों में धंसता चला जाता है जो मनुष्य समय के साथ रसना और वासना की इच्छाओं पर काबू पा लेता है वो धर्म कर्म की ओर तेजी से बढ़ता हुआ भवसागर से पार हो जाता है स्वामी जी ने बताया कि जन कल्याण हेतु सदैव धर्म पालना आवश्यक है उन्होंने बताया कि सनातन धर्म अनादि काल से चल रहा है महाशिवपुराण भी भगवान शंकर की उत्पति है उन्होंने कहा कि कलयुग को आए मात्र 5000 साल ही हुए हैं जबकि इसकी आयु 4 करोड़ 38 लाख साल है अभी से सनातन धर्म को हानि पहुंचाने के लिए बहुत अधिक पंथ बन गए हैं कलयुग के आखरी चरण आने तक सनातन धर्म का क्या होगा आरती से पूर्व विनोद जग्गा, एक्सईन कृष्ण गर्ग भुच्चो वाले, प्रभुदयाल जी मेहता, पूर्व मुलतान के पूर्व प्रधान नन्द लाल मेहता, धर्मपाल धींगडा, मुल्ख राज वधवा, ने माला पहना कर स्वामी जी का स्वागत किया।