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ओवरऐज हो चुकी 3 एम्बुलेंस चालकों के लिए बनी सिरदर्द

7 वर्ष पहले
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घायलमरीज तक तत्काल मदद पहुंचाना एम्बुलेंस चालकों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। एक तरफ जहां आला अधिकारी घटना स्थल पर 15 मिनट में सहायता पहुंचने के लिए चालकों पर दबाव बना रहे हैं तो वहीं कंडम हो चुकी 3 एम्बुलेंस चालकों के लिए सिरदर्द बन गई हैं। यह तीनों एम्बुलेंस जहां ओवरऐज हो चुकी हैं वहीं 6 अन्य एम्बुलेंस सितंबर माह में ओवरऐज हो जाएगी। जबकि बात स्वास्थ्य विभाग की करें तो विभाग ने अभी तक कंडम हो चुकी एम्बुलेंसों को रिप्लेस नहीं किया है।

जिससे मरीज की जान आपताकालीन स्थित में एम्बुलेंस खराब होने पर खतरे में पड़ सकती है। एम्बुलेंस चालकों का कहना है कि लंबे रूट पर चलते ही तीन एम्बुलेंस बीच-बीच में बंद होने लगती है। इन एम्बुलेंसों का रास्ते में कभी कोई पुर्जा तो कभी कोई पुर्जा खराब हो जाता है। जबकि अधिकारी स्थिति से वाकिफ होते हुए अनजान बने हुए हैं।

^तीन एम्बुलेंस की हालत बेहद खराब है। तीनों 2 लाख किलोमीटर से ऊपर चल चुकी हैं। एम्बुलेंसों को बदलने के लिए डिमांड भेजी गई है उम्मीद है तीन-चार माह में तीन नई एम्बुलेंस सामान्य अस्पताल के एम्बुलेंस बेड़े में शामिल हो जाएंगी।\\\'\\\' रवि,सामान्यअस्पताल के कर्मचारी।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि एम्बुलेंस कंडम होने की समय अवधि 2 लाख किलोमीटर रखी गई है। जबकि अस्पताल की 3 एम्बुलेंस सवा 2 लाख किलोमीटर चल चुकी हैं। जबकि 6 अन्य एम्बुलेंस का मीटर 1 लाख 99 हजार 1 लाख 98 हजार पर पहुंच गया है। एमरजेंसी की स्थिति में जैसे ही चालक गाड़ी को तेज करता है गाड़ी बजने लगती है और कोई पुर्जा खराब होकर रास्ते में ही रुक जाती है। वहीं बात स्वास्थ्य विभाग की करें तो नियम का पता होने के बावजूद भी कंडम हो चुकी एम्बुलेंस को अभी तक नहीं बदला गया है। 25 हजार किलोमीटर ज्यादा चलाए जाने के बाद भी विभाग इन एम्बुलेंसों से काम ले रहा है। ऐसे में यदि गंभीर रूप से जख्मी मरीज को अस्पताल पहुंचाते समय कोई एम्बुलेंस खराब हो गई तो अनहोनी हो सकती है।

सोनीपत. एंबुलेंसगाड़ी।