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हरियाणा बनने पर कब कौन जीता

7 वर्ष पहले
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हरियाणा बनने के बाद जिले की सीट में सेंध नहीं लगा सका जाट

हरियाणाबनने के बाद सोनीपत विधानसभा की सीट जाट प्रत्याशी के सामने किले के सामान खड़ी रही है। कोई भी जाट नेता इस दीवार को गिरा नहीं पाया है।

इस सीट पर हार जीत का निर्णय हर बार पंजाबी वोटर ने ही किया। जबकि जाट वोटरों की संख्या यहां 23 प्रतिशत के करीब रही है। जबकि पंजाबी वोटर जाट वोटर से सात प्रतिशत ही ज्यादा हैं। चौंकाने वाली बात तो यह है कि ब्राह्मण वोटर यहां करीब 13 बाणियां वोटर 7 प्रतिशत के करीब हैं। इन सबके बावजूद भी यह सोनीपत सीट पर किला फतह कर चुके हैं।

सोनीपत सीट पर बाप बेटा द्वारा जीत दर्ज करने का भी रिकार्ड है। ठक्कर मोहन ने हरियाणा बनते ही सोनीपत सीट से चुनाव जीता था। इसके बाद उनके परिवार पर 2000 तक किसी ने दांव नहीं खेला। लेकिन कांग्रेस पार्टी 2005 में उनके पुत्र अनिल ठक्कर पर दांव खेला। इस दांव पर अनिल ठक्कर खरे उतरे। उन्होंने 2005 में चुनाव जीतकर इस सीट पर अनोखा रिकार्ड बनाया।

इंडियन नेशनल लोकदल के सवैये किसी भी पार्टी ने जाट नेता को अपनी पार्टी में तवज्जो नहीं दी। कांग्रेस ने जहां पंजाबी नेता को अपना प्रत्याशी बनाया है वहीं बीजेपी ने बाणिया पंजाबी को ही अपना प्रत्याशी बनाया है। हाल की स्थिति पर नजर डालें तो अभी भी कोई जाट नेता ऐसा नहीं है जो कांग्रेस बीजेपी में टिकट का प्रबल दावेदार रहा हो। कांग्रेस में जहां अनिल ठक्कर देवराज दीवार का नाम सबसे ऊपर था वहीं बीजेपी में कविता जैन ललित बत्रा पर सबकी नजरें टिकी हुई थी।

हरिजन 11236

सुनार 5100

मुसलमान 4800

धानक 10248

वाल्मीकि 6000

जाति संख्या

पंजाबी39800

जाट 33511

ब्राहमण 18575

बाणिया 10236

नाम जाति सन

ठक्करमोहन पंजाबी 1967

चिरंजीलाल ब्राहमण 1972

देवीदास पंजाबी 1977

देवीदास पंजाबी 1982

देवीदास पंजाबी 1987

श्यामदास मुखिजा पंजाबी 1991

देवराज दीवान पंजाबी 1996

देवराज दीवान पंजाबी 2000

अनिल ठक्कर पंजाबी 2005

कविता जैन जैन 2009