हिंदी में बोलो और हिंदी में जियो
भारतीयभाषा संस्थान गुजरात विद्यापीठ अहमदाबाद की प्रोफेसर डॉ. अंजना संधीर का कहना है कि हमें हिंदुस्तान में हिंदी की बजाय अंग्रेजी में संवाद करने पर गर्व की अनुभूति की जाने लगी है जो उचित नहीं है।
हिंदी भाषी होने पर हमें गर्व होना चाहिए क्योंकि विश्वभर में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी प्रथम स्थान पर है जबकि अंग्रेजी का चौथा स्थान आता है। उन्होंने कहा कि हिंदी में बोलो और हिंदी में जियो। वे जीवीएम गर्ल्स काॅलेज में हिंदी विभाग के संयोजन में आयोजित व्याख्यान को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रही थी। डाॅ. संधीर ने युवा पीढ़ी का आह्वान किया कि वे स्वयं पढ़ें और एक अन्य जन को भी पढ़ाने की जिम्मेदारी वहन करें।
इस मौके पर प्राचार्य डाॅ. ज्योति जुनेजा ने डा. अंजना संधीर का स्वागत किया। कार्यक्रम की संयोजक एवं हिंदी विभाग की अध्यक्ष डा. रेणू भाटिया डॉ. वंदना विजय वेदालंकार ने हिंदी के महत्व से सभी को अवगत कराया।
इस अवसर पर हिंदी विभाग के संयोजन में गत 13 सितंबर को हुई प्रतियोगिताओं की विजेताओं को भी पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। इनमें काव्य लेखन में साक्षी कादयान को प्रथम, ज्योति आंतिल सुमन को संयुक्त रूप से द्वितीय तथा संजीता को तृतीय और निबंध लेखन में ज्योति को प्रथम, नेहा मलिक को द्वितीय और नितिका को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
सोनीपत. जीवीएमकॉलेज में हिंदी दिवस पर छात्रा को पुरस्कृत करती हुई डॉ. अंजना संधीर।