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आशा और सुख का प्रतीक रामायण : नवरतन

7 वर्ष पहले
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सोनीपत | सेक्टर15 स्थित श्रीराम शरणम् आश्रम में आयोजित रामायण महायज्ञ के चौथे दिन नवरतन चोपड़ा ने कहा किष्किंधा कांड में प्रवेश किया। उन्होंने सुंदरकांड का वर्णन करते हुए कहा कि जब हनुमान बानर सेना सहित माता सीता का पता लगाने के लिए समुद्र के किनारे पहुंचते हैं, तो सभी समुद्र को देखकर निराश हो जाते हैं। तभी जामवंत हनुमान को उनकी ताकत का एहसास दिलाते हैं। उन्हें बताते हैं कि वह अतुलित बल के सागर हैं। वह जहां भी चाहे वहां तक जा सकते हैं। जो भी चाहें वह कर सकते हैं। उन्हें अपने बल का एहसास होते ही वह समुद्र पार करने के लिए तैयार हो जाते हैं। जिससे राम की बानर सेना में उत्साह का संचार होता है। हनुमानजी जब समुद्र पार करते हैं, तो सबसे पहली मुलाकात उनकी विभीषण होती है। दो अक्टूबर को आश्रम में भगत हंसराज का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाएगा।