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महर्षि नारद के श्राप से हुआ राम अवतार

7 वर्ष पहले
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महर्षिनारद को अपने ब्रह्मचर्य और ईश्वर की भक्ति पर काफी गुमान हो गया था। भगवान विष्णु, महामाया और अन्य देवी देवताओं को उनका यह अहंकार अच्छा नहीं लगा। शीलनिधि नामक राजा ने अपनी पुत्री का स्वयंवर रखा।

जो स्वयं महालक्ष्मी का अवतार थी। उनका हाथ देखने के लिए ब्रह्मर्षि नारद को बुलाया गया। नारद हाथ उनका रूप देखकर मोहित हो गए। वह भगवान विष्णु के पास सुंदर रूप मांगने चले गए। भगवान तथास्तु कहकर उनका शरीर बदल और मुहं वैसा ही छोड़ दिया। स्वयंवर में महामाया ने भगवान विष्णु का वरण किया तो आश्चर्य चकित रह गया और उनके रूप को देखकर सभी हंसने लगे। जिससे क्रोधित होकर नारद ने भगवान विष्णु को नारी विरह में भटकने का श्राप दे दिया।

कामी रोड स्थित श्री रामलीला मैदान में बुधवार से श्री रामलीला का मंचन शुरू हो गया। रामलीला शाम चार बजे से रात्रि आठ बजे तक होगा। बुधवार को गणेश पूजन के साथ ही नारद मोह से श्रीराम जन्म तक की कथा का मंचन किया गया। जिसमें ब्रह्मर्षि नारद का रूप सबसे मनमोहन रहा। मंचन में नारद की भूमिका अदा करने वाले कलाकार नारद के चरित्र को जीवंत कर दिया।

नारद का बार बार महामाया के सामने झुकना और उनका आगे बढ़ जाना। स्वयंवर में खड़े राजा राजकुमारों का परिहास उनकी समझ में नहीं आया। वहीं जब भगवान विष्णु ने स्वयंवर के बाद उन्हें अपना मुहं देखने के लिए कहा तो वह देखते ही क्रोधित हो गए। दोनों को एक दूसरे के विरह में भटकने का श्राप दे डाला। वहीं पर शिव के गण जय और विजय को भी उन्होंने श्राप दिया। रावण और कुंभकरण के रूप में पैदा हुए। भगवान राम का वनवास और सीता का रावण द्वारा हरण करना पूर्व से विधि द्वारा रचित एक प्रसंग था। पूजन विधि को दयानंद सरस्वती यति महाराज की मौजूदगी में संपन्न कराया गया। इस दौरान रामलीला कमेटी कार्यकारिणी के प्रधान विजय गौतम, महासचिव राजकुमार गोयल, वरिष्ठ उपप्रधान दीपक कुच्छल, महेंद्र मंगला और महेंद्र वर्मा मौजूद रहे।

सोनीपत. आजसे कर्मी रोड पर शुरू हुई रामलीला का मनमोहक दृश्य