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चार बाल अपराधी दो साल करेंगे रोगियों की देखरेख
उम्रछोटी है। पहले जुवेनाइल जेल में रहे और शहर के सरकारी अस्पताल में रोगियों की सेवा कर बाकी की सजा काट रहे हैं। उनके मन पर इस बात का गहरा असर है कि भले ही वे सजा काट लें लेकिन अपराध बोध उन्हें जिंदगी भर टीस देता रहेगा।
एक इंजीनियर की पढ़ाई पूरी कर चुका है तो दूसरा बीकॉम पास है। उनके दो साथी अभी पढ़ रहे हैं। इन का मानना है कि वे आदतन अपराधी नहीं है। हालात और वकीलों की दलील के कारण अदालत ने उन्हें दोषी मान लिया।
जिससेसुबह झगड़ा किया शाम को उसकी मिली लाश
परमीतबताते हैं कि उस समय वे 18 साल के थे जब 4 अप्रैल 2009 को वे हाउसिंग बोर्ड की बंद मार्केट में एक दुकान में वीडियो गेम खेल रहे थे। उनके साथ हाउसिंग बोर्ड के रहने वाले भूपेंद्र (13), शिव काॅलोनी के पवन (14) सफीदों के रहने वाले दिनेश (15) भी थे। किसी बात को लेकर उनका पड़ोसी अमर जीत(22) से झगड़ा हो गया। उसी रात अमरजीत का शव हाउसिंग बोर्ड काॅलोनी में मिला। पुलिस ने उन्हें अमरजीत की हत्या में गिरफ्तार कर लिया। पांच महीने सोनीपत की जुवेनाइल जेल में काटने के बाद 2011 में जज बशरुदीन की अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई। 2012 में एडीजे कंचन माही की अदालत ने सजा काम कर दो साल कर दी। इस अवधि में उन्हें अस्पताल में सेवा करनी होगी।
सजा के दौरान जमानत पर आए इन चारों युवकों ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनके दूसरे साथी भी पढ़ रहे हैं। परमीत पवन कहते हैं कि किसी दुखी की सेवा कर उन्हें सुकून तो मिलता है। मगर ये दर्द भी नहीं मिटता कि वे हत्या की सजा काट रहे हैं। अदालत की सजा के अनुसार वे चारों सुबह 8 बजे से दो बजे तक सेवा करेंगे।