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रामलीला मंचन: चार पीढ़ियों से राम का किरदार निभा रहे हैं एक ही परिवार के सदस्य
कामीरोड स्थित रामलीला मैदान में हो रही रामलीला से जुडे़ स्वामी शिवदयाल शर्मा एवं स्वामी गिरिराज प्रसाद शर्मा की चार पीढिय़ां रामलीला से जुड़ी हैं। इसमें सबसे खास बात है कि इन सभी ने भगवान राम के किरदार को जीवंत को किया है। इन लोगों को कहना है कि यह केवल पर्दे पर ही नहीं बल्कि रियल लाइफ में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के चरित्रों का अनुकरण करते हैं।
इस परिवार के किसी भी सदस्य ने आज तक लहसुन प्याज तक नहीं खाया है। रामलीला मंचन के दौरान यह अपना भोजन भी स्वयं ही बनाते हैं। स्वामी शिवदयाल ने बताया कि उनके दादा और पिताजी ने भी राम के किरदार को जीवंत किया है। इसके बाद वह और उनके बेटा इस किरदार को निभा रहा है। चार पीढ़ियों से रामलीला और रासलीला का मंचन किया जा रहा है। जिसके तहत करीब साढ़े तीन सौ मंचन अब तक किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि उनकी आने वाली पीढ़ी भी इसका अनुसरण कर सकती है।
शुक्रवार को रामलीला मंचन के दूसरे दिन रामलीला मैदान में रामलीला में महर्षि विश्वामित्र अयोध्या नरेश राजा दशरथ के यहां पहुंचकर उनसे अपने यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण का हाथ मांगते हैं। जिससे राजा दशरथ घबरा जाते हैं। विश्वामित्र इससे क्रोधित होकर वहां से चल पड़ते हैं। उन्हें राजगुरु वशिष्ठ मनाते हैं और राजा दशरथ को पुत्रों को भेजने के लिए कहते हैं। वन में पहुंचकर राम और लक्ष्मण ने खरदूषण ताड़का का वध कर उनका यज्ञ सफल बनाते हैं। जिसके बाद महाराजा जनक के बुलावे पर विश्वामित्र उन्हें लेकर जनकपुरी की ओर बढ़ जाते हैं। रास्ते गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का वह अपने चरण रज से उद्धार सदियों के अभिशाप से मुक्त करते हैं। रामलीला में दर्शकों ने खूब लुत्फ उठाया। रामलीला के दूसरे दिन मैदान में काफी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे। सभी ने रामलीला का भरपूर मजा लिया।
सोनीपत. कामीरोड स्थित मैदान मे रामलीला का मंचन करते कलाकार।