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सिस्टम से तंग इंजीनियरिंग स्टूडेंट जाएगा कोर्ट
महर्षिदयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक की परीक्षा प्रणाली को लेकर एक फिर सवाल खड़ा हो गया है। एक विद्यार्थी जिसका परीक्षा परिणाम 15 सितंबर को आया था वह उसे दुरुस्त कराने के लिए विवि के दर्जनों चक्कर लगा चुका है, विवि के कुलपति से लेकर सीएम मनोहर लाल खट्टर के दरबार में भी गुहार लगा चुका है, लेकिन जहां विवि में उसे कभी संतोषजनक जवाब भी नहीं मिला तो सीएम दरबार से भी बात आश्वासन से आगे नहीं बढ़ सकी है। सिस्टम की खामी से सिविल इंजीनयिरिंग कर रहा यह विद्यार्थी इस कदर त्रस्त है कि अब उसकी काेर्ट पर भी उम्मीद टिकी है। वह जल्द ही पेपरों की जांच की फरियाद के साथ कोर्ट में अपील करेगा।
परेशान छात्र दिनेश आंतिल ने बताया कि वे पेपर की जांच को लेकर कई बार विवि के चक्कर काट चुका है, लेकिन विवि में उसकी समस्या का समाधान करने के बजाए उसे धमकाया जाता है। जिससे वह बेहद निराश है। उन्होंने कहा कि उसके बाकी सभी पेपर क्लियर है, लेकिन इस पेपर की ढंग से जांच नहीं होने के कारण उसका भविष्य प्रभावित हो रहा है। क्योंकि इस कारण वह किसी जॉब के लिए आवेदन भी नहीं कर पा रहा है। उन्होंने कहा कि विवि की ओर से अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वह भी गुडगांव की पिंकी की तरह कोई कड़ा कदम उठाने को मजबूर होगा। जिसकी जिम्मेदारी विवि प्रशासन की होगी। इस संदर्भ में भी कुलपति एचएस चहल को अवगत करवा दिया है।
एमडीयू की ओर से हॉल ही में प्रिंसिपलों की बैठक लेकर यह भरोसा दिलाया गया था कि परीक्षा प्रणाली में सुधार किया जा रहा है, लेकिन यह मामला बताता है कि हकीकत और दावे में फर्क बहुत गहरा है।
शहर के हिंदू इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र दिनेश आंतिल 2010 बैच का स्टूडेंट है। जिसने 26 मई 2014 को छठे सेमेस्टर में सिविल इंजीनयिरिंग ट्रेड की डिजाइन ऑफ कंकरीट स्ट्रक्चर 2 विषय की परीक्षा दी। जिसका परीक्षा परिणाम 15 सितंबर को घोषित किया गया। जिसमें उन्हें सात अंक दिए गए। परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट दिनेश ने जब विवि में संपर्क किया तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। निराश होकर आरटीआई लगाई। जिसमें भी कई विरोधाभासी चींजे सामने आई। मसलन जहां एक ओर कई सवालों के उत्तरों की ठीक से जांच ही नहीं हुई तो वहीं सही और गलत में भी पूरे नंबर नहीं दिए गए।
एमडीयू की ओर से यह बहुत बड़ी गडबड़ी है। कॉलेज की ओर से इसकी अधिकृत रूप से विवि को शि