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राम विवाह की खुशियों को कैकेयी ने मातम में बदला

7 वर्ष पहले
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कामीरोड स्थित रामलीला मैदान में आयोजित रामलीला राम के विवाह के बाद अयोध्या में जश्न का माहौल था। चारों तरफ खुशियां ही खुशियां दिखाई दी। विवाह के बाद महाराजा दशरथ ने रानियों से अपनी उम्र का हवाला देते हुए राम का राजतिलक करने का मशविरा करते हैं। जिससे अयोध्या वासियों की खुशियों को पंख लग जाता है।

लेकिन यह खबर जब मंथरा को लगी तो उसकी कुटिल बुद्धि को बात हजम नहीं हुई। वह कैकेयी को इस तरह से अपने बातों के मायाजाल में उलझाई कि कैकेयी ने महाराजा दशरथ से अपने सबसे प्रिय पुत्र राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और भरत के लिए राजगद्दी का वचन मांग लिया। जिसे सुनकर महाराजा अचेत हो जाते हैं और कैकेयी से वचन बदलने की मिन्नत करने लगते हैं। लेकिन उनकी कैकेयी ने नहीं सुनी और अपने वचन पर अडिग रहते राम वनवास करा दिया।

रामलीला के पांचवें दिन राम वनवास और दशरथ कैकेयी संवाद का मंचन किया गया। कैकेयी द्वारा मांगे गए वचन की खबर जब राम को लगी तो वह अपने पिता महाराजा दशरथ के यहां पहुंचे और उनको संभालते हुए कहा कि उन्हें वचन का पालन करना चाहिए। उनके लिए सौभाग्य है कि वह अपने पिता के वचनों का पालन करें। उधर लक्ष्मण और सीता भी उनके साथ वन को जाने लिए तैयार होते हैं। जिन्हें राम समझाने का प्रयास करते हैं, लेकिन सफल नहीं होते हैं। वहीं दूसरी ओर महाराजा दशरथ पुत्र वियोग में महारानी कैकेयी से तरह-तरह की मिन्नत करते हैं, लेकिन वह नहीं मानती। अंतत: पुत्र वियोग में महाराजा दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। जिससे अयोध्या में मातम का छा जाता है। इसकी सूचना मामा के यहां के रह रहे राजकुमार भरत और शत्रुघ्न को दी जाती है।

सूचना मिलते ही दोनों भाई चल पड़ते हैं। अयोध्या पहुंचने पर भरत माता कैकेयी के व्यवहार से दुखी और विह्वल होकर विलाप करने लगते हैं। जिसके बाद राजगुरु वशिष्ठ उन्हें राम को मनाने के लिए वन जाने की सला देते हैं। यह दृश्य बहुत की मनोरम दर्शाया गया।

सोनीपत. कामीरोड स्थित रामलीला मैदान में आयोजित रामलीला का मंचन करते कलाकार।