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93 दिनों के लिए शुक्र अस्त, नहीं होंगे शुभ कार्य

7 वर्ष पहले
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शादीको जन्म जन्मांतर का बंधन माना जाता है। इसमें हर दंपती मान-सम्मान, ऐश्वर्य और सुख को पाने की उम्मीद करता है। मान-सम्मान और ऐश्वर्य का देवता गुरु को माना जाता है। वहीं दूसरी ओर सुख का देवता शुक्र को माना जाता है। जो दो अक्टूबर से लंबी छुट्टी पर जाने वाला है। शुक्र देवता के बिना शादी विवाह समेत अन्य कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जा सकता। नवरात्र, जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि, देवउठनी एकादशी को भी बिना किसी योग के शुभ माना जाता है। 25 सितंबर से नवरात्र शुरू हुए हैं।

इस बार नवरात्र में चतुर्थी के बाद शादी का शुभ योग नहीं है और ही देवउठनी एकादशी में। इसके बावजूद इनमें कोई शादी करता है तो ज्योतिष की नजर में वह शुभ नहीं मानी जाएगी। ज्योतिष के विद्वानों का मानना है कि सितंबर में केवल 25, 26 28 सितंबर को ही शुभ योग थे। जिसके बाद अब दिसंबर में दो, तीन, पांच छह तिथियों को शुभ योग रहेगा। इसके अलावा बाकी दिनों में तारा डूबा रहने से शादी विवाह के लिए शुभ योग नहीं होंगे।

तीनमहीने का इंतजार: इनतीन माह के 93 दिन शेष पड़े हैं, लेकिन इन 93 दिनों में केवल 7 दिन ही शादी विवाह जैसे कार्यों के लिए शुभ हैं। हालांकि अभी तक इन तीनों माह को शादियों के सीजन के तौर पर जाना जाता है, लेकिन पुरोहितों की मानें तो केवल सात दिन ही शहनाइयां बज सकेंगी। शादियों का शुभ योग होने से बाजार में मंदी के बादल छाए दिख रहे हैं।

पंडित हनुमान प्रसाद पाठक ने बताया कि दो अक्टूबर से 27 नवंबर तक शुक्र तारा डूबा रहेगा। इससे शादियों के लिए शुभ योग मात्र सात दिन के बन रहे हैं। इस बार करीब दो माह तक तारा डूबा रहेगा। इस कारण शुभ कार्यों के लिए शुभ योग नहीं बन सकेंगे। योग नहीं बनने का असर सभी वर्गों पर पड़ता दिख रहा है। अब जो सात दिन शुभ योग के आने वाले हैं, शादी के लिए वहीं दिन उत्तम रहेंगे।

शादियों का शुभ योग कम बनने से बाजार में मंदी रह सकती है। क्योंकि दुकानदार से लेकर व्यापारी तक सभी को शादियों के सीजन का बेसब्री से इंतजार है। ऐसे में सेल कम होने से दुकानदारों को काफी नुकसान होगा, लेकिन दीपावली सीजन होने के कारण थोड़ी राहत जरूर मिलेगी।