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आखिर हमारी क्या है गलती

7 वर्ष पहले
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दिन के समय ट्रैक्टर-ट्राॅली पर रोक, सड़क पर उतरे चालक

शहरकी ट्रैफिक समस्या को सुलझाने में लगे प्रशासन ने रेहड़ी चालकों पर सख्ती के बाद अब डस्ट, रेत, मिट्टी, गिट्टी, ईंटों सहित अन्य सामान की सप्लाई करने वाले ट्रैक्टर-ट्राली चालकों पर दिन के समय शहर में प्रवेश पर सख्ती की है। जाम से बचने के लिए दिन के समय ट्रैक्टर-ट्राली पर प्रतिबंध लगाए जाने ट्रैक्टरों के चालान करने से चालक श्रमिक परेशान हैं।

अपनी इस परेशानी को लेकर सोमवार को काफी संख्या में ट्रैक्टर चालकों ने भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा के अध्यक्ष विमल किशोर के नेतृत्व में शहर के महाराणा प्रताप चौक से होते हुए डीसी कार्यालय तक प्रदर्शन किया। फिर पांच सदस्यीय कमेटी ने डीएसपी प्रदीप के सामने अपनी मांग रखी। डीएसपी के साथ करीब 15 मिनट चली बातचीत के बाद कोई हल नहीं निकला।

^डस्ट सप्लाई करने का ट्रैक्टर-ट्राली चालकों के पास कोई कामर्शियल परमिट नहीं है। सोमवार को जो शिकायत चालकों ने की है उसे कप्तान साहब के संज्ञान में लाया जाएगा। वह जैसे आदेश देंगे उसके अनुसार आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।\\\'\\\'प्रदीप, डीएसपी।

बिट्टू।

बिट्टू निवासी सोनीपत ने बताया कि शहर में लगने वाले जाम के लिए ट्रैक्टर-ट्राली चालक जिम्मेदार नहीं है। जाम के लिए अतिक्रमण जिम्मेदार है। यदि प्रशासन अतिक्रमण हटाने पर जोर दे तो समस्या का हल हो सकता है। उन्होंने कहा कि डस्ट के खरीददार दिन के समय आते हैं रात को कोई नहीं आता। ऐसे में उन्हें राहत दी जानी चाहिए ताकि वे मजदूरी कर अपने परिवार का पेट भर सके।

नंदू।

मनोज।

नंदू निवासी सोनीपत ने बताया कि वह अपने परिवार का पेट डस्ट लोड करने की मजदूरी करके पालता है। परंतु सप्ताह भर से मानसिक रूप से परेशान है। पुलिस द्वारा जब से डस्ट सप्लाई करने वाले ट्रैक्टर ट्राली पर रोक लगाई है। कहीं काम नहीं मिल रहा है। मन में अब बार-बार एक ही बात रही है कि क्या मजदूर कर पेट पालना भी गुनाह है।

सिसाना गांव निवासी मनोज ने बताया कि दिन के समय प्रशासन द्वारा ट्रैक्टर ट्राली चलाए जाने पर प्रतिबंध लगाए जाने से रोजगार सप्ताह भर से ठप हो गया है। घर चलाना जहां मुश्किल हो गया है। वहीं हालत भुखमरी जैसी हो गई है। रोजगार मिलने पर ट्रैक्टर लोन पर खरीदा था, लेकिन अब पुलिस द्वारा धड़ाधड़ चालान करने से मन परेशान है कि चालान कैसे भुगतूं और